यूपीए के मुकाबले 19 अरब रुपये महंगी पड़ी मोदी सरकार की राफेल डील: द हिंदू

यह कितनी विचित्र बात है कि मंत्रालय से अहम दस्ता वेज चोरी हो गए हैं लेकिन ऐसा हुआ है या देश को बेवकूफ बनाया जा रहा है. राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार के मामले में केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से घिर चुकी है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं. वहीं इस सौदे को लेकर एक नई रिपोर्ट भी सामने आई है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांसीसी कंपनी से डील करने वाले भारतीय निगोसिएटिंग टीम ने आखिरी रिपोर्ट में यह बतया था कि एक समानांतर सौदेबाजी से भारत का पक्ष कमजोर हुआ है. वरिष्ठत पत्रकार एन. राम ने द हिन्दूज में लिखा है कि भारतीय निगोसिएटिंग टीम ने सौदे की बैंक गारंटी का प्रभाव 574 मिलियन यूरो (45,75,39,41,220 रुपये) आंका था। बैंक गारंटी न मिलने से 36 राफेल विमानों का सौदा संयुक्तर प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय शुरू हुई सौदेबाजी की अनुमानित कीमत से 246.11 मिलियन यूरो (19,61,76,00,128 रुपये) महंगा हो गया. 21 जुलाई, 2016 को भारत की ओर से मोल-भाव करने वाली टीम ने रक्षा मंत्रालय को अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी.
एन. राम ने द हिन्दूं में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. जिसमें लिखा गया है कि बैंक गारंटी के प्रभाव को हटाकर 7878.98 मिलियन यूरो की अंतिम पेशकश (10.55 मिलियन यूरो की अतिरिक्तो अनिवार्य हथियार सप्ला ई के अलावा) मूल एमएमआरसीए (मीडियम मल्टी‍ रोल कॉम्बै्ट एयरक्राफ्ट) प्रस्ताअव की लागत (8205.87 मिलियन यूरो) से 327.89 मिलियन यूरो कम है जबकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि नए सौदे और मूल एमएमआरसीए प्रस्तािव की कीमतों की तुलना करते समय बैंक गारंटी की लोडिंग के प्रभाव को ध्या2न में क्योंन नहीं रखा गया.
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि इंडियन नेगोशियेटिंग टीम ने बैंक गारंटी की लागत 574 मिलियन यूरो कैसे आंकी. इसकी गणना एसबीआई द्वारा 2 मार्च 2016 की गई जानकारी के आधार पर, 2 प्रतिशत के वार्षिक बैंक कमीशन (एक भारतीय बैंक के कंफर्मेशन चार्जेस शामिल) पर की गई. बैंक गारंटी का कुल व्या पारिक प्रभाव कॉन्ट्रैीक्टं वैल्यूश का 7.28 प्रतिशत निकलकर आया. द हिन्दू के मुताबिक, इसी रिपोर्ट के पैरा 21, 22 और 23 में बैंक गारंटी को लेकर विस्ता र से जानकारी दी गई है.
इंडियन नेगोशियेटिंग टीम की रिपोर्ट बताती है कि भारत की तरफ से मध्य स्थोंय ने फ्रांस पर बैंक गारंटी देने का दबाव बनाया था. दिसंबर 2015 में विधि और न्याय मंत्रालय ने लिखित में सलाह दी थी कि सौदे में सप्लायई और सेवाओं की डिलीवरी के बिना भारी भुगतान के मद्देनजर कानूनी सुरक्षा के लिए फ्रांस से सरकारी या संप्रभु गारंटी जरूर ली जानी चाहिए. फ्रांस ने सौदेबाजी के दौरान बैंक गारंटी देने से साफ इंकार कर दिया, जबकि दसॉल्ट एविएशन के मूल एमएमआरसीए प्रस्ताैव में यह बात साफतौर पर लिखा गया है.