हैकिंग के दावे में है कितना सच

प्रिय पाठकों, सन 1982 में भारत में पहली बार केरल में पारूर विधान सभा उपचुनाव में सिर्फ 50 पोलिंग बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को अपनाया गया। इसके बाद सन 1998 में मघ्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली को मिलाकर कुल 16 विधान सभा सीटों के लिए इसका इस्तेमाल हुआ और फिर सन 2004 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं ईवीएम से वोट डाले गए। यह हम सब जानते हैं कि यह एक मशीन है जिसके लिए हार्डवेयर और सोफ्टवेयर चाहिए होता है। इस पर मैमोरी और चिप भी लगता है। ईवीएम पर सवाल शुरू से ही उठते रहे हैं। नीदरलैंड, जर्मनी, अमेरिका, इत्यादि कई बड़े देशों में ईवीएम पर विश्वास नहीं किया जाता है। इन देशों ने कहा कि हमें कम्प्यूटर पर भरोसा नहीं है।
2014 के लोकसभा चुनाव, दिल्ली विधान सभा चुनाव, या अन्य राज्यों में हुए चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल हुआ जिसको लेकर लोगों तथा राजनेताओं को ईवीएम के भूत का डर हुआ। इसी भूत को लेकर एक अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट सैयद सूजा ने दावा किया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ गड़बड़ी की गई थी। हालही में हुए इंडियन जर्नलिस्ट असोसिएशन (यूरोप) की तरफ से लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिसमें ईवीएम के बारे में चर्चा हुई उसमें कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। लंदन में हुई हैकथॉन में इस साइबर एक्सपर्ट सैयद सूजा ने दावा किया है कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने के बारे में जानकारी रखते थे। है। जिसके कारण मुंडे की ‘हत्या’ हुई और मुंडे मामले की जांच करने वाले एनआईए अफसर तंजील अहमद की भी हत्या हुई थी क्योंकि वह एफआईआर दर्ज करने वाले थे, मुंडे की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं हुई है।
साइबर एक्सपर्ट सैयद सूजा ने बहुत सारी बातें मीडिया के सामने रखी। यह तो दुनिया के सामने बात आ गयी है कि 2014 के चुनाव में देश की जनता के साथ धोखा हुआ है इसमें चुनाव आयोग नही बल्कि कुछ जयचंद जैसे लोगों का हाथ रहा है। उसने कहा कि ग्रेफाइट आधारित ट्रांसमीटर की मदद से ईवीएम को खोला जा सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कोई व्यक्ति ईवीएम के डेटा को मैन्युपुलेट करने के लिए लगातार पिंग कर रहा था। पिंग इंटरनेट को देखने की कमाण्ड है। 2014 में बीजेपी के कई नेताओं को इस बारे में जानकारी थी। उसने दावा किया कि जब उन्होंने एक अन्य बीजेपी नेता तक यह बात पहुंचाई तो उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या करवा दी गई। एक्सपर्ट का दावा है कि ईवीएम हैक करने में रिलायंस कम्युनिकेशन बीजेपी की मदद करती है। एक्सपर्ट का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के चुनाव में इस ट्रांसमिशन को रुकवा दिया था इसलिए बीजेपी यह चुनाव हार गई थी। दिल्ली के चुनाव में बीजेपी की आईटी सेल द्वारा किया गया ट्रांसमिशन पकड़ में आ गया था। एक्सपर्ट ने कहा, हमने ट्रांसमिशन को आम आदमी पार्टी के पक्ष में कर दिया था। एक्सपर्ट ने दावा किया है कि उन्होंने (बीजेपी) के कम फ्रिक्वेंसी वाले ट्रांसमिशन को भी इंटरसेप्ट करने की कोशिश की थी। बीजेपी को जब ईवीएम को लेकर चुनौती दी गई तो उन्होंने ऐसी मशीन का इस्तेमाल किया, जिसे हम भी हैक नहीं कर सकते हैं।
प्रिय पाठका,े यह कुछ लोगों की शैतानी दिमांग की उपज हो सकती है और इस बात से इंकार भी नही किया जा सकता है कि कुछ शैतान अपना दिमांग अपने दुनियावी लाभ के लिए एजेंसी बनाकर सुनियोजित तरीके से किसी पार्टी विशेष को विजयी बनाने का ठेका लेकर करते हंै। आज के दौर में भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया, एजेंसी, सेल तथा अन्य नामों के भूतों का राज है जिनसे वोटर को गुमराह किया जाता है। हैकर के दावे में कितनी सच्चाई है यह हम नही बता सकते लेकिन यह जरूर है कि कुछ सच्चाई जरूर है। कहावत है कि बिना हवा ख़ारिज हुए बदबू नही आती। अब बेचारे वोटर को अपने ईद-गिर्द के माहौल पर गौर करके अपने क्षेत्र के कर्मठ, ईमानदार, इंसानियत प्रिय, भगवान से डरने वाले समाजसेवी, ज्ञानी, उच्च विचार वाले उम्मीद्दवार को ही अपना किमती वोट देना चाहिए फिर चाहे वह किसी भी पार्टी से हो।
धन्यवाद!
मो. इस्माईल, एडीटर