प्रियंका के कारण रणनीति और राजनीति पर कितना असर?

प्रिय पाठको, प्रियंका गाँधी के राजनीति के मैदान में आने को लेकर सब लोग खासतौर पर राजनीतिक दल विश्लेषण करने, गणित में फेर बदल में लग गए हैं. इस राजनीति के खेल को गंदा करने में भाजपा के उनके नेता आधारहीन प्रतिक्रियाएं प्रियंका गांधी के बारे दे रहे हैं. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, बिहार सरकार में मंत्री विनोद नारायण झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा जी इत्यादि सब यह क्या कह रहे हैं. इन लोगों को अपनी नहीं कम से कम भाजपा की छवि का ख्याल करना चाहिए. अब जब देश में लोकसभा के अहम चुनाव नजदीक आ रहे हैं. यह तो पता है कि देश की जनता देख रही है. भाजपा नेता अपने वोटबैंक को बनाए रखने के लिए कई बार बहुत ही अमर्यादित भाषा का उपयोग करते आए हैं जोकि भारतीय होने के नाते अशोभनीय है. हम किसी भी पार्टी, दल, क्षेत्र से हों हमारी संस्कृति वह नहीं है जो भाजपा के नेतागण उपयोग करते हैं. चाहे भाजपा के लोग कितना भी अपनी सफाई दें आज जनता के बीच भय का माहौल है वह सभी वर्गों के लिए है. देश में अगर सबका विकास चाहिए तो सबको भयमुक्त करना भी जरूरी है. आज पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक लोगों के बीच गाय का भूत, लिचिंग का भूत, जीएसटी का भूत और न जाने किन-किन शैतानों ने घर कर रखा है. अब भाजपा को अपने घोषणा-पत्र में इन तमाम भूतों को दूर करने का नुस्खा बताना होगा. आज का दौर मोबाईल का दौर है, कुछ भी नही छिप सकता या छिपाया जा सकता है. सबका लेखा- जोखा सोशल मीडिया के ख़जाने में जमा हो गया जो जब चाहे देख सकता है.
केन्द्र में भाजपा की सरकार है और पांच साल पूरे होने वाले हैं. विपक्ष का कहना है कि नोटबन्दी, जीएसटी से लोगों को सदमा हुआ है और वह अभी तक नहीं उभर पाया है. लोगों के कारोबार थप हो गए सबको नई सरकार का इंतजार है. अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार ने चुनाव से पहले जीएसटी में छूट, सवर्ण आरक्षण जैसे कदमों के बाद अब बजट में किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों समेत मध्यम वर्ग के लिए सौगातों की बौछार जो लगाई है यह सब देश की जनता समझती है यह सबकुछ सरकार के पहले साल शुरू में ही हो जाता तो कितना अच्छा होता.
लोक सभा चुनाव में अब जब मुश्किल से 100 दिन बचे होंगे. सभी दलों ने अपने-अपने गणित का पेपर भी तैयार कर लिया है और उसको हल करने के लिए फार्मूले भी बना लिए हैं. कुछ फार्मूले फ्यूज हैं और कुछ को पहाड़ों की ठंडी हवा के कारण शिलन लगने वाली है. 2019 के इस चुनावी घुड़दौड़ में अब नए साफ सुथरे घुड़सवारों को जनता देखना चाहती है. जनता अबकी बार बिल्कुल नया, अद्भुत, अनोखा देखना चाहती है. अब देखना यह है कि किसका चमत्कार, किसका जुगाड़ और किसका फार्मूला काम आता है.
देश ने देखा है कि पिछले एक दशक में देश के मतदाताओं का मिजाज काफी तेजी से बदल रहा हैं. कई राज्यों में क्षेत्रीय पार्टीयों ने सरकारें बनाई हैं उदाहरण बंगाल, तेलगाना, असम, आंध्रा इत्यादि हैं और दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपने आते ही किस तरह भाजपा और कांग्रेस जैसी पुरानी दलों के तमाम दिग्गजों को मात दी है.
देश की जनता क्या देखकर किसको वोट करती है यह समझना जरूरी है. जहां तक हमारी राय का सवाल है हम राजनीति को धर्म से दूर रखना चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों पर प्रतिबंध लगाए जो भ्रष्टाचार, जमाख़ोरी, जुर्म में शामिल हों. शायद यह अपवाद हो सकता है कि मगर मेरे विचार में कुछ धार्मिक लोग सभी धर्मों के लोगों के साथ न्याय नहीं कर पाते. इसलिए धार्मिक लोगों को अपने धर्म के काम करने चाहिए, उन्हें राजनीति से दूर रहना चाहिए.
कांग्रेस पार्टी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में प्रियंका को लेकर बहुत उत्साह देखा जा रहा है हालही में इसी सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रम हुए और हो रहे हैं. यह जरूर है कि तीन वजह से कांग्रेस पार्टी में जान आ पाई है. पहले तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत, दूसरा राहुल गांधी के अन्दर उत्साह एवं आत्मविश्वास और तीसरा प्रियंका गांधी. इन तीन कारणों ने एक लुप्त हो रही पार्टी के कार्यकत्र्ताओं में ऊर्जा का काम किया है. अब देखना यह है कि 2019 के इस लोक सभा चुनाव में प्रियंका का चमत्कार कांग्रेस पार्टी के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है.
हमारी अपने मतदाताओं से विनम्र अपील है कि यह समय विवेक से काम लेने का है. किसी पार्टी के लालच, लंबे वायदों, झूठे घोषणा-पत्र पर न जाए. सिर्फ अच्छे स्वच्छ छवि वाले उम्मीद्दवार को ही वोट दें फिर चाहे वह किसी भी दल से हो. किसी भी पार्टी विशेष को वोट न दें.
जयहिन्द! धन्यवाद!
-मोहम्मद इस्माईल, एडीटर