पुलवामा हमले पर राजनीति, शहीद सैनिकों का अनादर

प्रिय पाठको, पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में शहीद हुए 40 जवानों के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में शोक सभाएं, श्रद्धांजलि सभाएं, कैन्डल मार्च हो रहे हैं। हम भी प्रेस क्लब दिल्ली में एक शोक में शामिल हुए। देश के हर नागरिक के साथ हमारी संवेदना है। लेकिन कुछ असभ्‍य नेताओं ने अभद्र भाषा का उपयोग किया है। शहीद सैनिकों और उनके परिवारों को लेकर राजनीति करना बहुत ही अमर्यादापूर्ण है। कुछ असामाजिक तत्त्व वाले लोग भीड़ को सहारा बनाकर भड़काऊ भाषण देकर अराजकता फैलाते हैं जिसके कारण माहौल को बिगाड़ा जाता है या राजनीतिक लाभ उठाया जाता है और वह भी शहीद सैनिकों के खून से।
एक बात हम देशवासियों को समझ लेनी चाहिए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है फिर कश्मीरियों पर शक की नज़र क्यूं? जैसे हमारा गढ़वाल, हिमाचल, यानि पूरा हिमालय क्षेत्र के लोग हैं वैसे ही कश्मीर के लोग होते हैं। जिस तरह पूरे भारत के लोग एक-दूसरे राज्य में उत्तम भविष्य, शिक्षा, रोज़गार, कारोबार के लिए जाते हैं और उस राज्य में ठहरते हें या बस जाते हैं उसी तरह हमारे कश्मीर के भाई-बहन भी देश के विभिन्न राज्यों में अपनी ज़रूरत के लिए रह रहे हैं। उन्हें हमारी ख़ास प्रेम की ज़रूरत है। सीमावर्ती राज्य होने की वजह से जब भी सीमा पर थोड़ा भी तनाव बढ़ता है तब बैचारे कश्मीरी भाई-बहनों को भय और असुरक्षा में रहना पड़ता है। अपने ही देश में यह कैसी आजादी है?
14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर राज्य के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों के गम में सभी धर्मों के लोग बराबर के शरीक हैं। और जहां तक भारतीय मुसलमानों का सवाल है वह 100 प्रतिशत शांतीप्रिय है। देश नहीं अपितु पूरे विश्व में शांती चाहता है। इंसानी जान की कीमत का कोई बदल नही हो सकता है। इसलिए इंसान को बचाने के लिए जो भी कदम हो सकता है वह किया जाना चाहिए।
यहां हम आपको प्रधानमंत्री मोदी जी के उस भाषण के कुछ अंश से अवगत करा रहे हैं जो उन्होंने तब दिए थे जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केन्द्र में डाॅ. मनमोहन सिंह जी देश के प्रधानमंत्री थे। यह गौर करने की चीज है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने तब कहा था वह बिल्कुल सच कहा था लेकिन अब जब वे प्रधानमंत्री हैं उनके हाथ में पावर है फिर यह सब क्यूं हो रहा है?
‘‘मुझे जवाब दीजिए ये जो आतंकवादी हें, ये जो नक्सलवादी हैं उनके पास शस्त्र और बारूद कहां से आता है, वो तो विदेश की धरती से आता है। ये सीमाएं सम्पूर्णरूप से आपके कब्ज़े में है। सीमा सुरक्षा बल आपके कब्ज़े में है। मैंने दूसरा सवाल पूछा आतंकवादियों के पास धन आता है हवाले से आता है, पूरा मनि-ट्रांजेक्शन सरकार के कब्ज़े में है, आरबीआई के कब्ज़े में है, बैंकों के माध्यम से होता है। क्या प्रधानमंत्री आप इतनी भी निगरानी नही रख सकते कि जो यह धन विदेश से आकर आतंकवादियों के हाथ जाता है आपके हाथ में आप उसको क्यू नही रोकते हैं? मैंने तीसरा सवाल उनको पूछा कि विदेशों से घूसपैठी आते हैं, आतंकवादियों के रूप में आते हैं। आतंकवादी घटनाएं करते हैं, भाग जाते हैं, प्रधानमंत्री जी आप हमें बताईए, सीमाएं आपके हाथ में हैं, सैनाएं आपके हाथ में हैं, नेवी आपके हाथ में है, विदेशी घुसपैठी कैसे घुस जाते हैं? मैंने चैथा सवाल पूछा कि सारा कम्यूनिकेशन भारत सरकार के हाथ में है। कोई भी टेलीफोन पर बात करता है, ईमेल भेजता है कोई भी कम्यूनिकेशन करता है, भारत सरकार उसको इंटरप्ट कर सकती है, इंटरप्ट करके जानकारी पा सकती है और इस पर कौनसा कम्यूनिकेशन चल रहा है उसे रोक सकती है। मैं पूछना चाहता हूं प्रधानमंत्री जी को आपने इस विषय में क्या किया है? मैंने पांचवां सवाल उनसे पूछा कि विदेशों में जो आतंकवादी भाग चूके हैं, जो आंतकवादी विदेशों में बैठकर हिन्दुस्तान में आतंकवादी की घटनाएं कर रहे हैं, उनको प्रत्यारोपण के द्वारा हिन्दुस्तान लाने का अधिकार हमें होता है। आपकी विदेश नीति पर क्या ताकत है? एक बार इन पांचों चीजों पर कुछ करके दिखाईए, आतंकवाद जड़ से उखड़ जाएगा। राज्यों के अधिकार हथियाकरके राजनीति के खेल करने को छोड़ दीजिए। भाईयो और बहनों दिल्ली की सल्तनत के पास मेरे इन सवालों के जवाब नही हैं। दिल्ली की सरकार में वह सीना नही है, 46 ईंच का सीना लगता है दोस्तो!’’
प्रिय पाठको, मोदी जी प्रधानमंत्री हैं और अब उन्हें खुद उन पांच सवालों के जवाब देना चाहिए जो उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन जी से किए थे। दरअसल उनकी गल्ती बिल्कुल नही है और न उनकी नियत में खोट है। हमें खोट लगता है हमारे सिस्टम में। यह भीड़तंत्र, धनतंत्र, भ्रष्टाचारी राजनीतिक षड़यंत्र का हिस्सा है। बोलने और करने में जमीं आसमान का अंतर है। हमारा सैटालाईट, सिक्यूरिटी और कैमरों को जंग लग गया। हमारी सुरक्षा एजेंसियों की नींद पूरी करने के लिए देश का धन बांटा जाता है। यूरोप की तरह हमारे देश में शांती नही है क्यूं? क्यंू लूट की जगह विकास नही है? आखिर कब तक देशवासी डर और असुरक्षा में रहेंगे? आगे हम देखेंगे, बैठे रहेंगे और सोचेंगे, अगली सरकार के आने तक और अगले पांच साल।
धन्यवाद!
-मोहम्मद इस्माईल, एडीटर