एक देश, एक शिक्षा नीति लागू हो: डॉक्टर नीलम

-अजय कुमार पांडे
औरंगाबाद, (बिहार), 9 जनवरी, 2019: बिहार के औरंगाबाद जिला अंतर्गत बारून प्रखंड निवासी प्रख्यात डॉक्टर नीलम ने इस बार काराकाट लोकसभा क्षेत्र से जनता के डिमांड पर चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की है। किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेगी या निर्दलीय अभी तय नहीं हो पाया है। जब संवाददाता से विभिन्न मुद्दों पर वार्ता हुई तो सवालों का जवाब देते हुए उन्हों ने कहा कि एक देश, एक शिक्षा नीति अवश्य लागू होनी चाहिए, तभी देश में असली विकास संभव है। सरकारी विद्यालयों का हाल देख लीजिए, जहां कमजोर वर्ग के बच्चे ही सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाते हैं न कि आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के बच्चे।
आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावक तो अपने बच्चों का ऐडमिशन प्राइवेट विद्यालयों में कराते हैं और गरीब अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में तो माना जा सकता है कि सरकारी विद्यालयों में किस ढंग की पढ़ाई होती है जो किसी से छुपी हुई नहीं है। द्वेष की भावना तो यही से प्रारंभ हो गई है। जब उनसे पूछा गया कि चुनाव प्रारंभ होने से पूर्व किसी भी पॉलीटिकल पार्टी के बड़बोलेपन नेता द्वारा मीडिया को मंदिर-मस्जिद, जाति, धर्म, आरक्षण के नाम पर अनाप-शनाप बकवास किया जाता है जो कि मतदाताओं का ध्यान भटकाने वाला है आखिर ऐसा क्यों किया जात है? तब डॉ निलम ने कहा कि अधिकांश ऐसे लोग राजतंत्र में अपने आप को हमेशा बनाए रखना चाहते हैं और अपने बाप की बपौती समझते हैं और ये सिर्फ मीडिया के माध्यम से छाए रहने के लिए ऐसा करते हैं। मुस्लिम समाज के बच्चों को देखें अधिकांश इनके बच्चे शिक्षा पाने के बजाय कम उम्र से ही अर्थ उपार्जन के लिए विभिन्न प्रकार का काम करना शुरू कर देते हैं। ऐसी स्थिति में मुस्लिम परिवार को भी चाहिए कि पढ़ाई की उम्र में अपने बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने के लिए जागरूक करें। परंपरा बदलने की जरूरत है। शिक्षा से ही बच्चों को अच्छे संस्कार मिलेंगे और तभी देश का वास्तविक विकास संभव हो पाएगा।
आरक्षण के मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए डॉ निलम ने कहा कि सरकार को चाहिए कि देश में आरक्षण नीति को बिल्कुल समाप्त करें। ऐसा नहीं है कि स्वर्ण जाति में लोग गरीब नहीं है सरकार द्वारा चलाई जा रही फ्री योजना को भी बंद किया जाए। इसके स्थान पर शिक्षा नीति में सुधार करने पर बल दें। तभी देश का भला होगा। कल यदि ऐसे लोग ही अन्य जातियों में जन्म लेंगे तो क्या करेंगे? सरकार को चाहिए कि ठोस निर्णय लेते हुए देशहित में उस प्रकार का उचित व्यवस्था बनाएं जो देश के संविधान से जात-पात हटाकर सिर्फ एक भारतीय के नाम से जाने जाएं। देश का एक बच्चा बादाम खाएगा और दूसरा सूखी रोटी आखिर ऐसा क्यों?
स्वर्ण आरक्षण के मामले में पात्रता 8 लाख रुपया प्रति वर्ष से कम आमदनी वाले को रखने की बात कही गई है। क्या 8 लाख रुपया की वार्षिक आमदनी कम होती है? इसके अलावा मिडिल क्लास के लोग कहां जाएंगे? संवाददाता ने जब पूछा कि इसके स्थान पर समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े स्वर्ण जाति के लोगों को भी उचित सर्वे कराकर ही संसद में कानून संशोधन कर आरक्षण नीति क्यों न बनाई जाए? और सर्वे के दौरान सरकार को गलत रिपोर्ट पेश करने वाले दोषी लोगों पर भी न्याय संगत उचित कार्रवाई करने का संविधान क्यों न बनाया जाए? दूसरा पहलू यह भी है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व में ही कह चुका है कि संविधान में 50% से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता। वर्तमान तक 49:5% सरकार द्वारा आरक्षण दिया भी जा चुका है। डॉ निलम ने जवाब में कहा कि उचित सर्वे कराकर ही संसद में बिल पेश किया जाए अन्यथा आरक्षण बिल्कुल ही समाप्त कर दिया जाए तो बेहतर होगा जिससे देशवासियों में द्वेष की भावना खत्म हो जाएगी। देश के अंदर बिना पढ़े लिखे चुनाव जीत कर जन प्रतिनिधि बनने वाले लोगों पर भी चिंता जाहिर करते हुए डॉ निलम ने कहा कि ऐसे लोग पंचायत जनप्रतिनिधि बनकर या विधानसभा, लोकसभा में पहुंच कर क्या करेंगे जिनकी बुनियाद ही गंदी हो वे देश ढांचा बिगाड़ कर रख देते हैं? महिलाओं के अधिकार के बारे में भी जोर देते हुए उन्होंुने कहा कि बेटी को भी मां-बाप की संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए तभी वास्तव में ससुराल में बेटी को कोई प्रताड़ित नहीं करेगा। इस्लांम धर्म में मां-बाप की संपत्ति में हिस्सेि का प्रावधान है और मुझे मालुम नहीं कि कोई देता होगा। सरकार को चाहिए कि महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव तभी आएगा जब समाज के बीच नैतिकता का पाठ भी सिखाया जाए। महिलाओं को भी पॉलिटिक्स में वास्तविक अधिकार या आरक्षण देकर विधानसभा, लोकसभा में भेजा जाए।
बिहार के शराबबंदी मुद्दे पर भी पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंजने कहा कि बिना प्लेटफार्म तैयार किए शराबबंदी तो कर दी गई लेकिन बिहार में क्या हो रहा है जिसके बारे में मैं यही कहना चाहूंगी की भारत में ज्याबदातर पार्टी के लोगों की नियत ही सही नहीं है। सर्वप्रथम हमें अपनी नियतों को सुधारने की जरूरत है। हमारी नियत में खोट हैं, चाल है, जुमला है और धोका है। हम क्याो हैं वह हमारे काम से जनता के बीच जाकर पता चलता है। इसलिए जनता को अज्ञानी, बैवकूफ समझने की कभी भूल नही करनी चाहिए।