विधानसभा चुनाव परिणाम, लोकसभा 2019 का सेमिफाईनल?

प्रिय पाठको, पांच राज्यों में विधान सभा के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है। इन विधान सभा चुनाव के परिणाम 11 दिसंबर को आ जाएंगे। राजस्थान और तेलंगाना में एक ही दिन 7 दिसंबर को मत डाले जाएंगे। छत्तीसगढ़, मिजोरम, मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव हो चुके हैं। क्या इन विधानसभा चुनावों को लोक सभा के चुनाव 2019 का सेमीफाइनल माना जाय? क्या इन विधानसभा चुनाव से यह पता लग जाएगा कि जनता का रूख किधर है और ऊंट किस करवट बैठेगा? भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, जमाखोरी, मिलावट, सामाजिक सुरक्षा, गरीबी, मकान इत्यादि ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान लगता है कभी नहीं हो पायेगा। सड़कंे चमकाने, चांद पर जाने की तैयारी, रोकेट, मिसाईल, बुलैट ट्रैन इत्यादि किसी गरीब की भूख नही मिटा सकते हैं। अभी भी देश गरीब है, आज भी हमारी मां बहने कष्टदायक जीवन गुजार रहे हैं, आज भी हमारे लोग कच्चे मकानों में, झोपड़ियों में, तो कुछ आसमान के नीचे खुले में रह रहे हैं। आज भी हमारे देशवासी भूख में सोते हैं। हम कौन सा विकास चाह रहे हैं? किस विकास की बात हम कर रहे हैं? वर्तमान सरकार ने वायदा किया था कि कालाधन वापस आयेगा, हर नागरिक के अकाउंट में 15 लाख जमा होंगे, स्वच्छता होगी, बेरोजगारी दूर होगी और न जाने क्या क्या लेकिन निकला क्या?
जनता में सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध रोष हमेशा देखा जाता रहा है और नाराजगी में सारा किया काम नज़रों से हट जाता है। इस नाराजगी का असर इन चुनावों में कितना होगा यह इन पांचों राज्यों में हुए वोट औसत से पता चलेगा। कौन जीतता है और कौन हारता है। यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। यह महत्वपूर्ण होगा कि जनता का रूख किस तरफ है। जिसका सीधा लाभ यकीनन उस राजनीतिक दल को मिलेगा।
जनता लोकतंत्र में एक प्यादे की तरह होती है। झूठे लुभाने वायदों और लच्छेदार भाषणों में आकर ठगे जाते हैं जिनमें वास्तविक मुद्दे नदारद रहते हैं। हमारे नेता चाहते हैं कि अपने धन बल से लोगों को वशीभूत करके सत्ता हासिल की जाय जोकि लगभग सभी राजनीति दल करते हैं। जमीन से लगे सामाजिक नेता बहुत कम होते हैं जो बिना किसी जाति, धर्म के भेदभाव के निस्वार्थ जनसेवा करना अपना कर्तव्य समझते हों। देखने में अक्सर यह आया है कि हर चुनाव में अन्तिम समय तक हर दल अपने विरोधी पक्षों का झूठ सच किसी भी सूरत में हो जनता के बीच ले जाना चाहते हैं।
राजनीतिक दल मुद्दों से भटकाने के लिए लुभावाने उपहार के झांसे में डालकर जनता को गुमराह करते रहे हैं। सत्ता, विपक्ष सभी दलों के नेता मुद्दों से दूरी रखते हैं और असली मुद्दों को कभी न ख़त्म होने के लिए छोड़ दिया जाता है अगले चुनाव तक। भारत का मतदाता भी यह समझता है कि किसी राजनेता एव ंदल के पास कोई ठोस और ईमानदार सोच नही है। आज का नेता करोड़ों रूपया खर्च करने के बाद जब चुनाव जीतता है तो पहले वह अपना चुनाव में लगा हुआ धन वापस पाने के लिए हथकंडे अपनाता है फिर अपने इर्द गिर्द रिश्तेदारों, चमचों एवं अन्य के द्वारा अपने भविष्य के लिए रास्ता बनाता है। सोचने वाली बात यह है कि क्या ऐसा नेता देश व समाज का कभी भला कर सकता है? क्या ऐसा नेता जिसकी नियत और मकसद सिर्फ देश को लूटना है, वह समाज और देश का क्या भला कर पायेगा?
आधुनिक चुनाव प्रणाली जनता के लिए कोई फायदे नही दे रही है। यह असहाय, लाचार और बेकार हो गई। इसका वजूद एक आवारा सांड की तरह हो गयी है जो एक जुआ है जो मजबूरी में खेलना पड़ता है जिसका लाभ खेलने वाले गूंगे, बहरे दर्शकों को नहीं मिलता बस वे हां में हां, ना में ना, या हाय हाय करके पांच साल काटने को मजबूर होते हैं।
हमारा मत तो यह है कि किसी दल विशेष को अपना वोट न देकर उस नेता विशेष को अपना बहुमूल्य वोट दें जो क्षेत्र विशेष की परेशानी को जानता हो, जिसकी समाज में छवि स्वच्छ हो, जो सभी धर्मों का आदर करता हो, गुंडा न हो, चोर डाकू न हो, समाज में शांति और क्षेत्र के विकास के लिए कार्यरत्त एवं ततपर रहता हो, जिसका मकसद सिर्फ समाज सेवा हो। आओ ऐसे नेता को वोट देकर विजयी बनाएं। सुन्दर, स्वच्छ, विकसित एवं सुरक्षित समाज बनाएं।
-मो. इस्माईल, एडीटर