राफेल हाथी बिना जांच के बाहर कैसे?

प्रिय पाठको, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में अपना निर्णय देते हुए वर्तमान भाजपा की केन्द्र सरकार को क्लिन चिट दे दिया है. गौर करें एक राफेल विमान 1670 करोड़ रूपऐ का तो 36 राफेल विमान 60120 करोड़ में आऐंगे. राफेल का यह मामला आज देश में सुर्खियां बटोर रहा है. भारत जैसा गरीब देश जहां किसान गरीबी, सूखा, बेरोजगारी, भूखमरी के कारण देश के बहुमूल्य नागरिक आत्म हत्या करने पर मजबूर हैं. वहां चंद देश के जयचन्द देश को लूटने में, देश को कमजोर करने में लगे हैं. हमें कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं कहना है. क्यूंकि इसकी सही जांच अभी नही हुई है. इससे पहले भी देश में कई बड़े घोटाले हुए हैं जिनमें कुछ देश के लूटेरे सामने आये हैं मगर ज्यादातर घोटलों पर पर्दा ही पड़ा रहता है.
राफेल मामले में केन्द्र सरकार बयान बदल रही है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हलफनामा दायर कर फैसले के पाराग्राफ 25 में से सीएजी शब्द हटाने को कहा है. आपको बता दें कि सरकार ने पहले कोर्ट में जानकारी दी थी कि राफेल की कीमत संबंधित जानकारी सीएजी को दी गई थी. पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राफेल की कोई रिपोर्ट समिति के सामने नहीं आई और सीएजी को भी इसके बारे में पता नहीं है. हमारी मांग लगातार जेपीसी को लेकर है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है और उन्होंने सीधे तौर पर हमला करते हुए कहा कि चैकीदार ही चोर है और यह हम साबित करके रहेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि विमान सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है. हम जानते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के पास सभी पहलुओं पर विचार करने की शक्ति नहीं है. इसलिए कांग्रेस मामले में कभी भी सर्वोच्च न्यायालय नहीं गई. उन्होंने कहा, मैैं जेपीसी जांच के लिए नरेंद्र मोदी को चुनौती देता हूं. अगर आप डरे हुए नहीं हैं, तो फिर जेपीसी से जांच क्यों नहीं करवाते. सरकार को यह बताना होगा कि क्यों प्रति विमान कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़कर 1670 करोड़ रुपये हो गई. सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में सौदे के बारे में अधूरी जानकारी दी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब तकनीकी पक्ष और राफेल डील की प्राइसिंग की जांच ही नहीं की तो सरकार ‘क्लीन चिट’ का दावा कैसे कर रही है? राफेल में कथित भ्रष्टाचार, कीमत, तकनीक आदि की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित अथॉरिटी नहीं है. उन्होंने कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रिम कोर्ट ने खुद कहा है कि उसका अधिकार क्षेत्र सीमित है. कोर्ट ने कहा है कि हम कीमतों और तकनीक पर फैसला नहीं कर सकते हैं और इस खरीद की प्रक्रिया का जहां तक सवाल है तो राफेल एक दमदार प्लेन है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि सरकार कोर्ट में गलत तथ्य पेश करती है तो उसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है न कि कोर्ट. हम साबित करके रहेंगे कि राफेल केस में हम सही हैं.
कोर्ट को किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। देश को इन लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश इन विमानों के बगैर नहीं रह सकता है। जानना चाहेंगे कि क्याक देश में जंग जैसे हालात हैं?
कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2016 में राफेल सौदे को जब अंतिम रूप दिया जा रहा था उस वक्त किसी ने इसकी खरीद पर सवाल नहीं उठाया। उस वक्त इनकी कीमत 1670 करोड़ नहीं थी तब इनकी कीमत 526 करोड़ ही थी। उन्होंने कहा कि राफेल सौदे पर सवाल उस वक्त उठे जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने बयान दिया, यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में भाजपा के दो नेता और पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और विनीत ढांडा तथा आप पार्टी के नेता संजय सिंह शामिल थे जिसको कोर्ट ने नकार दिया।
इस तरह कहा जा सकात है कि यह तो अंधा कानून है, कानून भी खरीदा जा सकता है और गलत तथ्य पेश करके, झूठ को सही गलत तर्क देकर, मामले को भटका कर, गुनेहगार को बेकसूर साबित किया जा सकता है। राफेल डील बहुत बड़ा सौदा है जहां सीधे एक विमान पर 1144 करोड़ से ज्यादा कीमत का घोटाला है अगर वाकई इसमें सच्चाई है तो यह किसी देशद्रोह से कम नही है।
-मो. इस्माईल, एडीटर