भाजपा पर बरसे राज बब्बर, कहा- हनुमान जी को मत छेड़ो, तुम्हारी लंका में आग लगने वाली है

लखनऊ, 23 दिसम्बर, 2018: राज बब्बर ने हनुमान जी पर विवादित बयान देने वाले भाजपा नेताओं को नसीहत दी है. राज बब्बर का कहना है कि भाजपा नेताओं को हनुमान जी को छेड़ना नहीं चाहिए, देखना उनकी लंका में आग लगने वाली है. हनुमान जी को कोई खिलाड़ी बता रहा है, कोई जाट, कोई आर्य, कोई आदिवासी बता रहा है, कोई मुसलमान बता रहा है तो कोई कुछ बता रहा है. आखिर भाजपा वालों को हो क्यार गया है. इन्हीं सब विवादों के बीच अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने एंट्री कर ली है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि ”भाजपा वालों को ये समझ लेना चाहिए कि देखो ज्याोदा मत छेड़ो हनुमान जी को, उनकी पूंछ पर किए वार से तीन प्रदेश तो चले गए हैं, अब तुम्हामरी लंका में आग लगने वाली है.” अगर आप को याद हो तो राजस्थान के एक चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हनुमान जी दलित थे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद अनेक भाजपा नेताओं के हनुमान जी के बारे बयान आए हैं और सबने अलग-अलग जाति से होने का बताया. योगी सरकार में धार्मिक मामलों के मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि हनुमान जी जाट थे. उन्होंने कहा था कि हनुमान जी दूसरों को दिक्कत में देखकर कूद पड़ते थे इसलिए हनुमान जाट थे. राष्ट्रीय अनुसूचित- जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने दावा किया था कि हनुमान जी आदिवासी थे. ”मैं स्पष्ट करना चाहता हूं… लोग सोचते हैं कि भगवान राम की सेना में वानर, भालू, गिद्ध थे. ओरांव आदिवासी से संबद्ध लोगों द्वारा बोली जाने वाली कुरुख भाषा में ‘टिग्गा (एक गोत्र है यह) का अर्थ वानर होता है. कंवार आदिवासियों में, जिनसे मेरा संबंध है, एक गोत्र है जिसे हनुमान कहा जाता है.”
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबनेट मंत्री और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने बताया कि हनुमान जी कुश्ती लड़ते थे वो खिलाड़ी थे उनकी कोई जाति नहीं थी वो खिलाड़ी थे और मैं भी खिलाड़ी हूं. चेतन चौहान ने अमरोहा में पत्रकरों के सवालो का जवाब देते हुए हनुमान जी पर ये टिप्णी की थी. वहीं
भाजपा एमएलसी बुक्कल ननाव हनुमान जी को मुसमान बता चुके हैं. नवाब ने कहा, ”हनुमान जी मुसलमान थे. इसलिए मुसलमानों में जो नाम रखे जाते हैं – रहमान, रमज़ान, फरमान, ज़ीशान, कुर्बान – जैसे नाम रखे जाते है, बुक्कल नवाब ने कहा, करीब 100 नाम ऐसे हैं, जो हनुमान जी पर ही आधारित हैं. हिंदू भाई हनुमान जी नाम रख लेंगें, लेकिन सुल्तान नहीं मिलेगा, अरमान, रहमान, रमजान नहीं रख सकते.”
केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह ने कहा, ”भगवान राम और हनुमान जी के युग में इस देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी, कोई दलित, वंचित, शोषित नहीं था. वाल्मीकी रामायण और रामचरितमानस को आप पढ़ेंगे तो आपको मालूम चलेगा कि उस समय कोई जाति व्यवस्था नहीं थी.’ उन्होंने आगे कहा- ‘हनुमान जी आर्य थे, इस बात को मैंने स्पष्ट किया है, उस समय आर्य जाति थी और हनुमान जी उसी आर्य जाति के महापुरुष थे.”
अब इन नेताओं के बयान से यह साबित हो गया है ये लोग चुनाव जीतने के लिए किस सीमा तक जा सकते हैं. यह पाठकों को समझना चाहिए कौन क्याच बोल रहा है और क्यूं. देश के मतदाताओं को धर्म जाति से ऊपर उठकर उच्चर कल्याेणकारी विचारों वाले उम्मीोद्दवार को विजयी बनाना चाहिए.
-मो. इस्माईल, एडीटर