ख़तरनाक रासायनिक हथियारों से मानवजाति को ख़तरा

प्रिय पाठको, रसायनिक हथियार का मतलब ऐसे जहरीले रसायनों से है जिनकी रसायनिक क्रियाओं की वजह से इंसान एवं जानवर या तो गंभीर पूर से जख्मी हो जाते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है. हालही में सीरिया के उत्तर पश्चिमी इदलिब प्रांत में संदिग्ध रासायनिक हमले में कम से कम 100 लोगों की मौत हो गई थी और 400 से अधिक को सांस लेने तथा अन्य दिक्कतें हुई। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चे मारे गये थे। गेरहार्ड श्रेडर समेत कुछ जर्मन वैज्ञानिकों ने 1938 में सारिन तैयार किया था जिसे हानिकारक कीटों को मारने के लिए तैयार किया गया था। आज सारिन को सबसे खतरनाक तंत्रिका जहर यानी की नर्व गैस माना जाता है। ऐसे ही क्लोरीन का इस्तेमाल आम तौर पर सफाई, कीटनाशक बनाने, रबर बनाने या फिर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है लेकिन अगर क्लोरीन को ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो ये जानलेवा साबित होती है। यह गैस सीधे फेफड़ों पर हमला करती है और जान लेकर ही छोड़ती है। एक अनुमान के मुताबिक प्रथम विश्व युद्ध में करीब 13 लाख लोगों की मौत रासयनिक हमले से हुई थी जिनमें ज्यादा लोग आम नागरिक थे।
इराक हमले में अमेरिकी सेना ने सफेद फास्फोरस का इस्तेमाल किया था तथा रूस ने सीरिया के रक्का शहर में भी सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया था। यह रासायन हड्डियां तक गला देता है। यह रासायन किसी चमड़ी पर लग जाए तो उसे पूरी तरह से झुलसा देता है।
सैरीन नामक रसायन का इस्तेमाल रॉकेट के जरिए सीरिया के कुछ इलाकों में किया गया। इस रसायन को जीबी नाम से भी जाना जाता है। यह इतना खतरनाक रसायन है कि अगर इसकी एक बूंद भी किसी के सिर पर गिर जाए तो उसको बचाना मुश्किल हो जाता है।
ऐसा ही रासायन मस्टर्ड गैस है। यह कैमिकल किसी व्यक्ति की आंख, श्वासन तंत्र और त्वचा पर सीधा हमला करता है जिससे किसी भी शख्स की जान आसानी से जा सकती है। यह इंसान की शरीर के लिए ऊतकों को तेजी से नष्ट करने लगता है।
फॉस्जीन गैस के हमले के बाद शरीर पर छाले पड़ जाते हैं, और इंसान और जानवर अंधे हो जाते है। शरीर जलने की वजह से उसकी मौत हो जाती है।
सीरिया के शहर सराकेब में सन 2016 में क्लोरीन गैस से भरे बैरल गिराए गए। क्लोरीन गैस से प्रभावित लोगों को सांस लेने में तकलीफ होतर है और उनके मुंह से ख़ून निकलता है। युद्ध के दौरान इस रासायनिक हथियार का इस्तेमाल दुश्मनों को तड़पाकर मारने के लिए किया जाता है। यह हवा से भारी होता है और तेजी से फैलता है इसलिए इससे तेजी से लोग प्रभावित होते हैं।
अमरीका समेत करीब 180 से ज्यादा देशों ने रासायनिक हथियारों को खत्म करने के लिए संधि की है और वायदा किया है कि वे इनके इस्तेमाल पर रोक लगाऐंगे। अंतर्राष्ट्रीय रासायनिक हथियार संधि में शामिल अधिकतर देशों के पास ऐसे हथियार नहीं हैं। अमरीका ने अपने पास रासायनिक हथियार होने की बात स्वीकार की है, लेकिन साथ ही इन्हें नष्ट करने का वायदा भी किया है।
संयुक्त राष्ट्र समर्थित संस्था ओपीसीडब्यू यानी की ऑर्गनाइजेशन फॉर प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपंस दुनिया में रसायनिक हथियारों को खत्म करने के लिए सर्कीय काम कर रही है जिसे नोबेल पुरस्कार भी मिला है। इसमाटाइम्स हमेशा से मानवता को बचाने के लिए सक्रीय रहा है और मानवता को बचाने हेतु हर संस्था की सराहना भी करता रहा है।
-मो. इस्माकईल, एडीटर