स्वास्थ्य पर गहराता सोशल मीडिया का असर

Magnified illustration with the word Social Media on white background.

प्रिय पाठको हम सब सोशल मीडिया पर घंटों समय बिता देते हैं। लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि इसके कारण आपको क्या-क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि सोशल मीडिया के क्या विपरीत परिणाम हो सकते हैं।सोशल मीडिया ने हमें जितना ज्यादा लोगों से जोड़ने का काम किया है, उससे कई ज्यादा इसने हमारे मन मस्तिष्क पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। हम आज तकनीक के मामले में बहुत ज्यादा आधुनिक हो चुके हैं, लेकिन हम यह भूलते जा रहे हैं कि इसके विपरीत परिणामों ने हमारे अंदर घर कर लिया है। सोशल मीडिया ने ना केवल हमारे भीतर मानसिक कमजोरी को पैदा किया, बल्कि इन कमोजरियों के साथ-साथ मानसिक रोगों को भी जन्म दिया है। इसके कारण हमारे भीतर की रचनाशीलता कमजोर होती जा रही है। हम सभी लोगों के पास होते हुए भी उनसे बहुत ज्यादा दूर हो चुके हैं। ज्यादा से ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने के कारण हमें इसकी आदत हो गयी है और इनका हमारे मष्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ा है। क्योंकि जिस तरह से हम आज सोशल मीडिया पर लगातार अपना समय बिता रहे हैं, इसका सीधा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। आइए जानते हैं सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य के बीच क्या सम्बंध है।सोशल मीडिया आज हमारे लिए एक सुविधा के साथ-साथ एक बड़ी समस्या भी बनता जा रहा है। खासकर युवाओं के लिए। जिन युवाओं को एक समय पर उनकी नई सोच के लिए जाना जाता था, आज सोशल मीडिया ने उनसे उनकी उस सोच को छीन लिया है। आज लोग सोशल मीडिया का इतना ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं कि उनकी खुद की सोचने और समझने की शक्ति कम होने लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम जो कुछ भी सोशल मीडिया पर देखते हैं उसे ही सत्य मान लेते हैं और उसी पर विश्वास करने लगते हैं। जिसके कारण दिमाग में सोचने समझने की क्षमता पर फर्क पड़ने लगता है।सोशल मीडिया एक तरह का वर्चुअल समाज है, जहां हमारे जैसे लाखो लोग होते हैं जिनसे हम रोज़ाना ऑनलाइन मिलते हैं और उनसे अपनी बातों को साझा करते हैं। इसके कारण हमने बहुत से दोस्त तो बना लिए है लेकिन जो असल में हमारे करीबी हैं, उनसे हम पूरी तरह से अलग हो जाते है। क्योंकि सोशल मीडिया हमारे मन मस्तिष्क पर इस कदर हावी हो जाता है कि हम उससे बाहर निकलना नहीं चाहते हैं और ज्यादा से ज्यादा वही पर अपना समय बिताना चाहते हैं। ऐसे में बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कट जाते हैं। बाहर की दुनिया से दूर होते चले जाना ही सोशल डिसऑर्डर के होने की ओर संकेत करता है।किसी भी चीज को सामान्य से ज्यादा प्रयोग करना लत कहलाता है। इस तरह की प्रवृति आने के पीछे मानसिक विकारों को भी कारण ठहराया जाता है। आज सोशल मीडिया से भी लोगों में इस तरह की प्रवृति जागृत हो रही है। इसके कारण लोग बाकी सभी कामों को छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ सोशल मीडिया में अपना वक्त ज़ाया कर रहे हैं जो करना ठीक नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है। हमारे भीतर की रचनात्मकता ख़त्म सी होती जा रही है। इस समस्या से कई अन्य तरह के मानसिक विकार उत्पन्न हो रहे हैं, जो हमारी सेहत के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक हैं।

दीपक निगम