मोबाइल की अनोखी दुनिया और आज के इंसान का जीवन

प्रिय पाठको आज की कहानी इंसान और मोबाइल फ़ोन के बीच की अनोखी दुनिया की है|आज के इस दौर में मोबाइल फ़ोन हर आदमी की जरुरत बन गया है | बच्चो से लेकर बुजुर्ग तक सभी मोबाइल फ़ोन का उपयोग कर रहे है|नि:संदेह मोबाइल फोन के असंख्य लाभ हैं-एमरजेंसी में डाक्टर और पुलिस बुलाने, घर से बाहर होने पर परिवार या दफ्तर वालों से संपर्क रखने, किसी को तत्काल महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने, किसी दुर्घटना का चित्र खींचने जैसे असंख्य लाभों के साथ-साथ इसकी कुछ हानियां भी हैं।लोगों, विशेषकर नवविवाहित जोड़ों के गृहस्थ जीवन में समस्याएं खड़ी करने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। जरा-जरा सी बात पर बेटियां अपनी माताओं को फोन लगाकर अपने पति या ससुराल वालों की शिकायतों का पिटारा खोल देती हैं और अनेक मामलों में माताओं द्वारा बेटियों को गलत सलाह देने के परिणामस्वरूप उनकी गृहस्थी खतरे में पड़ जाती है। आज के कुछ साल पहले मोबाइल का प्रयोग होता था जो लोग अपनों से दूर रहते थे उनसे बात कर सके और हाल चाल जान सके लेकिन अब तो मोबाइल हर इंसान की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है | एक बार खाना न मिले पर फ़ोन चार्ज और इंटरनेट होना चाहिए|पहले लोग आपस में बैठ कर घंटो बाते किया करते थे अगर किसी के घर कोई रिस्तेदार आया था तो सभी मिलने आते थे लकिन इन मोबाइल के दौर ने तो आपसी मेल जोल ख़तम सा ही कर दिया है | पहले घर में लड़ाई होती थी तो तार, चिट्ठी से खबर भेजी जाती थी और जब तक वो खबर घर पहुँचती तब तक तो झगड़े में सुलह भी हो जाती थी | और अब अगर किसी से लड़ाई हो तो मोबाइल से एक फ़ोन किया और कर ली भीड़ इकट्ठी, चाहे उस झगडे को आपसी सुलह से ख़त्म किया जा सकता था| इस मोबाइल के उपयोग ने इंसान के जीवन पर एक बहुत गहरा असर डाला है| इंसान अपने घर परिवार को समय नहीं दे रहे और मोबाइल में उलझ कर रह गए है|पहले पडोसी हाल पूछने घर आते थे लेकिन अब तो कह देते है कि व्हाट्स अप कर देना, मेसेज कर देना, बस जिंदगी एक बिजली के बोर्ड और चार्जर में उलझ कर रह गयी है| बल्कि में तो अपनी भाषा में ये कहूँगा कि मोबाइल इंसान के जीवन पर एक संकट की तरह है और ये एक ऐसा संकट है जो घटना होने बाद में समझ आएगा|
कविता:- सुबह ‘चार पर मुर्गे उठकर, हर दिन बांग लगाते थे।सोने वाले इंसानों को,’उठो-उठो’ चिल्लाते थे।किंतु आजकल भोर हुए,आवाज नहीं यह आती है।लगता है कि अब मुर्गों की,नींद नहीं खुल पाती है।मुर्गों के घर चलकर उनको,हम मोबाइल दे आएं।और अलार्म है, कैसे भरना,उनको समझाकर आएं।चार बजे का लगा अलार्म,मुर्गे जब उठ जाएंगे।कुकड़ूं कूं की बांग लगेगी,तो हम भी जग जाएंगे।मुन्नूजी ने इसी बात पर,पी.ए. को बुल‌वाया है।द‌स‌ ह‌जार मोबाइल‌ लेने,का आर्ड‌र‌ क‌र‌वाया है।
*जोक*-मरने से पहले यमराज ने आदमी से कहा हे मानव तूने अपनी अपनी जिंदगी में बहुत पुण्य किये है|इस लिए तुझे स्वर्ग में स्थान मिला है|आदमी बोला स्वर्ग में बजली का बोर्ड और इंटरनेट है यमराज बोले वो तो नर्क में है| आदमी बोला तो फिर मुझे नर्क में ही ले चलो|
-दीपक निगम