छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरूआत

नई दिल्ली 10 अक्टूबर 2018 : दुनिया भर में 10 अक्टूबर 2018 को मनाए जाने वाले विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के सिलसिले में मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल और न्यू रेनबो पब्लिक स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम कि शुरूआत किया। किशोरों में बढ़ते तनाव के मद्देनजर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने युवाओं और किशोरों को उनकी मानसिक समस्याओं से निपटने में मदद करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में आसपास के स्कूलों में दसवीं एवं ग्यारहवीं कक्षा के करीब 100 छात्रों ने भाग लिया, जिसमें विशेषज्ञों ने छात्रों को मानसिक समस्याओं तथा उनसे बचने के उपायों के बारे में छात्रों को शिक्षित किया।
इस कार्यक्रम की शुरूआत के साथ किशोरावस्था और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों के बारे में जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से स्कूलों के साथ मिलकर कार्यक्रम चलाएगा। कार्यशाला में विषेशज्ञों ने स्कूल के बच्चों के बीच तनाव की बढ़ती घटनाओं के बारे में जानकारी दी। किशोरावस्था के दौरान इन समस्याओं का सामना करने के लिए जीवन कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यशाला में भाग लेने वाले ज्यादातर छात्रों ने स्वीकार किया कि उनके जीवन में तनाव, अकेलापन बढ़ रहा है।
इस मौके पर अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं मानसिक स्वास्थ्य एवं बिहैवियर विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा. आनंदी लाल ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया ने किशोरावस्था के जीवन में एक प्रमुख स्थान ले लिया है। हालांकि सोशल नेटवर्किंग साइटें उपयोगी हैं, फिर भी इससे नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि 13 से 17 वर्ष की उम्र के आयु वर्ग के बच्चे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास के महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहे होते हैं। जीवन के इस महत्वपूर्ण दौर में उनका ध्यान अनावश्यक चीजों के कारण विचलित हो रहा है।’
डा. आनंदी लाल ने कहा, साइबर बुलिंग स्कूली छात्रों के बीच भावनात्मक पीड़ा के सबसे आम कारणों में से एक है और इसकी परिणति मानसिक संकट के रूप में हो सकता है, जो कभी-कभी आत्महत्या का कारण बन सकता है। किशोरावस्था अधिक संभावनाओं वाला दौर है जिसमें उच्च जोखिम वाली स्थिति में अधिक खतरे होते हैं। इसलिए जीवन की इस आरंभिक अवस्था में जीवन कौशल को विकसित करना उन बच्चों को सशक्त बनाने का एक प्रभावशाली माध्यम हो सकता है ताकि वे अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य कर सकें। उन्होंने कह कि जीवन कौशल में रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता के प्रति अपने को सक्षम बनाने के लिए सकारात्मक व्यवहार को अपनाने की काबिलियत शामिल है। मनोवैज्ञानिक दक्षताओं और पारस्परिक कौशल पर आयोजित होने वाली ऐसी कार्यशालाएं लोगों के लिए सूचित निर्णय लेने, समस्याओं को हल करने और महत्वपूर्ण और रचनात्मक सोच विकसित करने में मददगार होंगी। ऐसे कौशल विकसित करने से वे स्वस्थ संबंध बनाने में सक्षम होंगे और स्वस्थ और उत्पादक तरीके से बेहतर जीवन का प्रबंधन कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार तनाव से निपटना उन पहलुओं में से एक है जो तनाव के स्तर को नियंत्रित करने में आवश्यक होते हैं। कौशल का एक महत्वपूर्ण पहलू क्रोध या उदासी जैसी उन तीव्र भावनाओं को काबू में रखने के बारे में सीखना है जो हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। यह भी सीखना जरूरी है कि इस तरह की परिस्थितियों में तनाव से दूर कैसे रहा जाए तथा उनका सामना करने के लिए किस तरह के सकारात्मक तरीके अपनाए जाएं।