क्यों भेज दिया घूषखोरी करने वालें सीबीआई के दोनों अफसरों को छुट्टी पर

सी.बी.आई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को नरेन्द्र मोदी सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है। ताकि इस मामले की सही ठंग से जांच की जा सके वहीं सी.बी.आई के डायरेक्टर आलोक वर्मा पर उन्ही कि जांच एजंसियों ने तीन करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।तो वहीं दूसरी और आलोक वर्मा ने सी.बी.आई डायरेक्टर की हसियत से स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर दो करोड़ की रिश्वत लेनें के लिए एक कथित मामले में एफ.आई.आर करके जांच करना शुरु किया था। सी.बी.आई ने इसी सिलसिले में छापा मारा और अपने ही स्टाफ के डी.एस .पी देवेन्द्र कुमार को दोषी मानते हुए गिरफ्तार किया । जिसके चलते घूषखोरी,कालाबाजारी,घोटाले की जांच करने वाली सी.बी.आई खुद जांच के घेरे में आ गई है।
लेकिन राकेश अस्थाना अपने खिलाफ हुई एफ.आई.आऱ और गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट चले गये जिसके बाद केन्द्र सरकार ने दोनों सी.बी.आई के आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया । वहीं अब आलोक वर्मा छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है जिसमें उन्होने दिल्ली की केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही केन्द्र सरकार ने सी.बी.आई के उन अफसरों को भी हटा दिया है जो इस केस की जांच में सम्मलित थे। उनकी जगह पर नये सी.बी.ई अधिकारियों को रखा गया है। वहीं आपको बता दे कि राकेश अस्थाना का कभी भी विवादों में नहीं रहे है ये पहला मामला है जिसने उन्हे विवादों में ला दिया है। गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना मूल रुप से रांची के है। रांची में जन्म लेने वाले अस्थाना ने भ्रष्टाचार की कमर को मिटाने के लिए सच्ची लगन से मेहनत की और अच्छे-अच्छो को जेल की सलाखों में पहुचा दिया । चारा घटाला मामलें में लालू प्रसाद की गिरफ्तारी हो या गोधरा कांड, या फिर धनाबाद के डीजीएमएस के अधिकारी को रिश्रवत लेने का मामला ही क्यो न हो हर जगह उन्होने अपना वर्चस्व कायम रखा।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इस तथ्य से पूरी तरह अवगत हैं कि एजेंसी की विश्वसनीयता और छवि में किसी भी तरह की गिरावट से वे महत्वपूर्ण मामले प्रभावित होंगे, जिन्हें हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं। हम जो कुछ भी कर रहे हैं, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं सीबीआई की छवि को नुकसान न पहुंचे।’
अधिकारियों की इन करतूतों को देखते हुए अब यह कहा जा सकता है कि अब जांच एजेंसियों पर भी भरोषा नहीं किया जा सकता है।
-विजय भाटिया