मोबाईल टाॅवर बन रहे हैं स्वास्थ्य के लिए ख़तरा

मोबाईल टाॅवर आज स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या बन गये हैं। मोबाईल टाॅवरों से निकलने वाले हानिकारक विकिरण उत्सर्जित करते हैं और जब ये मोबाईल टाॅवर रिहायशी इलाकों में होते हैं तो तब ये और भी ख़तरनाक हो जाते हैं। मोबाईल टाॅवरों से निकलने वाली ख़तरनाक जहरीली किरणों की बात हम पहली बार नहीं कर रहे हैं इसके बार में बहुत बार कई समाचार पत्रों में आ चुकी है। यह तो यकीनी है कि थोड़े से लाभ के लिए सरकारी तंत्र की मदद से मोबाईल सेवा देनी वाली संस्थाएं रिहायशी इलाकों में टाॅवर लगाने में कामयाब हो जाती हैं। अब जब टाॅवर लग जाता है और इन अधिकारियों और बड़ी कंपनियों के विरोध में कोई आवाज़ नहीं उठती, इसलिए की आवाज़ को कहीं पहुंचने ही नहीं दिया जाता। जहां तक स्वास्थ्य को लेकर इन मोबाईल टाॅवरों को लेकर चर्चा करने का विषय है इसके बारे में पहले भी बहुत लिखा जा चुका है।
हमारे पास मोबाईल टाॅवर को लेकर एक शिकायत आई और जब हम ओखला में हाजी काॅलोनी गए तो देखकर आंखें दंग रह गई। के-3 ब्लाॅक की एक चार मंजिला मकान की पूरी छत पर लगभग 13 बड़े मोबाईल टाॅवरों उनके जेनेरेटरों के साथ लगे हुए हैं। हमारे संवाददाता को कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि औरतों और बच्चों के अन्दर कई तरह की अज्ञात लक्षण देखने को मिले हैं।
यह तो सिद्ध हो गया है कि मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती हैं। इन जहरीली रेडिएशन का जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही करण है कि जिस क्षेत्र में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है और मधुमक्खियां समाप्त हो जाती हैं।
विशेषज्ञों की माने तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटेना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। अगर किसी का घर टावर पर लगे ऐंटेना के सामने है या पीछे तो टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है और टावर पर जितने ज्यादा एंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा हो जाता है।
मोबाइल रेडिएशन से थकान, अनिद्रा, डिप्रेशन, ध्यान भंग, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, याद्दाश्त कमजोर होना, सिरदर्द, दिल की धड़कन का बढ़ना, पाचन क्रिया पर असर, कैंसर का खतरा बढ़ जाना, ब्रेन ट्यूमर इत्यादि के ख़तरे बढ़ जाते हैं।
टावर लगाने के लिए कुछ नियम हैंः छतों पर सिर्फ एक एंटीना वाला टावर ही लग सकता है। पांच मीटर से कम चैड़ी गलियों में टावर नहीं लग सकता। एक टावर पर लगे एंटीना के सामने 20 मीटर तक कोई घर नहीं होना चाहिए। टावर घनी आबादी से दूर होना चाहिए। जिस जगह पर टावर लगाया जाता है, वह प्लाट खाली होना चाहिए। उससे निकलने वाली रेडिएशन की रेंज कम होनी चाहिए। कम आबादी में जिस बिल्डिंग पर टावर लगाया जाता है, वह कम से कम पांच-छह मंजिला होनी चाहिए।
टावर के लिए रखा गया जेनरेटर बंद बॉडी का होना चाहिए, जिससे कि शोर न हो। जिस बिल्डिंग की छत पर टावर लगाया जाता है, वह कंडम नहीं होनी चाहिए। दो एंटीना वाले टावर के सामने घर की दूरी 35 और बारह एंटीना वाले की 75 मीटर जरूरी है। मोबाइल कंपनियों को अभी लगे टावरों से उत्सर्जित विकिरण को 90 फीसद तक कम करना होगा. निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पर 5 लाख रुपए प्रति टावर जुर्माना है।
2010 में डब्ल्यूएचओ की एक रिसर्च में खुलासा हुआ कि मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा है। हंगरी में वैज्ञानिकों ने पाया कि जो बहुत ज्यादा सेलफोन इस्तेमाल करते थे, उनके स्पर्म की संख्या कम हो गई। जर्मनी में हुई रिसर्च के मुताबिक जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर के एरिया में रह रहे थे, उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना बढ़ गई. 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है। केरल में की गई एक रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन टावरों से होने वाले रेडिएशन से मधुमक्खियों की कमर्शियल पॉपुलेशन 60 फीसदी तक गिर गई है।
प्रो. बीएस राय, एचओडी ईसीई, एमएमएमयूटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोबाइल टावर के रेडिएशन से डिप्रेशन, कैंसर जैसी कई बीमारियां होती हैं। ब्रेन ट्यूमर के केसेज बढ़ने के पीछे मोबाइल टावर का रेडिएशन ही जिम्मेदार है। यूजर्स को मोबाइल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए।
यह लेख लिखने का मुख्य उद्देश्य यह है कि सरकार तथा संबंधित विभाग इस ओर गौर करें और मोबाइल टावरों को रिहायशी इलाकों से हटाएं।
-मो. परवेज एवं दानिश नजिर, इसमाटाइम्स