पारदर्शी चुनाव कराने में चुनाव आयोग लाचार

प्रिय पाठको, देश की जनता शायद चुनाव आयुक्त टीएन सेशन जी को भूल गई हो। तिरुनेलई नारायण अय्यर सेशन को टीएन सेशन के नाम से जाना जाता है। सेशन जी को भारत में पारदर्शी चुनाव कराने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। वह भारत के सबसे प्रशंसनीय और विवादास्पद मुख्य निर्वाचन आयुक्त (1999-96) रहे थे। हमारा समाज अच्छाई की क़द्र करता है और सारे नेताओं की गतिविधियों को भी जानता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में भारतीय प्रजातंत्र को जिन्दा रखने के लिए चुनाव प्रणाली में सुधार किए थे। अपराधिक उम्मीद्दवारों को हटाने के लिए कुछ नियम बनाए थे। आप लोगों को यह भी याद होगा कि 2009, 2014 के आम चुनाव में चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीद्वारों से हिसाब मांगा था कि चुनाव में किस पार्टी ने कितना खर्चा किया और उसमें से कितना पैसा नकद आया और कितना चेक से आया, इत्यादि का ब्यौरा चुनाव आयोग ने इकट्ठा करने के निर्देश दिए थे। मगर यह हम सब जानते हैं कि कई राजनेताओं ने अपनी जो जायदाद दर्शाई है वह कितनी सही है यह कहा नही जा सकता है।
विदित हो कि 2009 के पिछले चुनाव में भाजपा का दावा था कि उसने 448 करोड़ रु. खर्च किए, जिसमें से 49 प्रतिशत चेक से आए, बाकी 51 प्रतिशत नकद आए जबकि कांग्रेस ने दावा किया था कि उसने सिर्फ 380 करोड़ रु. खर्च किए, जिसमें से सिर्फ 24 प्रतिशत चेक से आए और 76 प्रतिशत नकद आए। क्षेत्रीय पार्टियों के हिसाब में तो बड़ी गड़बड़ी है। कौन कैसा दावा करता है? किसमें कितनी सच्चाई है? हमारे पार्शद, विधायक, सांसद क्या करते हैं? कितना कमाते, कितना दिखाते है? जनता सब जानती है? हां यह जरूर है कि जनता निर्णय लेने में असमर्थ रहती है।
गौर करने की बात है कि क्या एक करोड़ या 50 लाख रु. प्रति सीट के हिसाब से लोकसभा की 540 और लगभग 4 हजार विधानसभा सीटों के लिए चुनाव लड़ा जा सकता है? देश की सभी पार्टियों का हिसाब-किताब जब तक पारदर्शी नहीं होगा तब तक हमारी राजनीति भ्रष्टाचार मुक्त नहीं हो सकती। हमारी राजनीति में दबाकर रिश्वत चलती है, खुलेआम अपराध, दलाली, दादागीरी चलती है, जनता के साथ ब्लेकमैल, लालच, झूठे वायदे किए जाते हैं। दरअसल जनता नेता विशेष को छोड़कर पार्टी के पीछे रहती है जबकि जनता को देखना यह चाहिए कि मेरे क्षेत्र का नेता कितना उनके काम आता है? कितना वह प्रशासन से उनके मामल़े निपटवाता है? तमाम रोजमर्रा के मसले सुनता है? वह नेता किस काम का जो 5 साल बाद नज़र आए? ऐसे नेता जो भ्रष्ट हो, गुंडा हो, दलाल हो, दादागीरी करता हो ऐसे असामाजिक, अपराधिक तत्वों को हमेशा राजनीतिक अधिकार जैसे हथियार से इन लोगों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।
प्रशासन के हर विभाग के अन्दर भ्रष्टाचार जड़ तक पहुंच चुका है। राजनीति में भ्रष्टाचार देश के लिए कोढ़ है जिसके कारण सही नेता कभी चुनकर नहीं आ सकता। सिर्फ चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय के पास वह अधिकार है जो देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सब दलों के लिए कुछ अनिवार्य गाईड लाईन बनाकर, नियम, कानून बनाकर, बुरी प्रवृत्ति के उम्मीद्दवारों को राजनीति में आने से रोक सकती है।
जनता को सही समझबूझ से अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। हर इंसान की जिन्दगी किमती है वह अपने हर पल का हिसाब लेकर चले और एक दिन, हफ्ता, महीना, साल और पांच सालों को किसे सौंप रहा है? आईए! अपनी इस धरती से घृणा, द्वेश, जलन, गरीबी, नफ़रत, हिंसा को मिटाकर सत्य, स्वस्थ, सुन्दर, पे्रम, सदभावना, भाईचारा और शांति का स्वर्ग बनाएं।
-मो. इस्माईल, एडीटर