गरीबी के आधार पर आरक्षण होना चाहिए

प्रिय पाठको, आरक्षण का मुद्दा कोई नया नहीं है और इस मुद्दे पर देश में जमकर बहस होती रही है। बहुत सालों से कुछ जाति विशेष को आरक्षण दिया जाता रहा है और इसके साथ ही कई जातियों ने भी आरक्षणों के लिए आवाज उठाई है। इसी के चलते केन्द्र सरकार ने आरक्षण की श्रेणी में कई नई जातियों को ले लिया है। इस बहस में कुछ लोग एक जाति या कुछ जातियों को आरक्षण देने के पक्ष में हैं तो कुछ जाति को आरक्षण न देकर सिर्फ गरीबों को आरक्षण देने के पक्ष में बातें करतें रहे हैं जिसकी बात अब कुछ राजनेता भी कर रहे हैं। जहां तक पिछड़ी जाति या अन्य जाति का सवाल है इसके लिए सरकार ने अलग से सरकारी नौकरी में विशेष छूट देने का पहले ही प्रावधान रखा है।
यह कहां का न्याय है कि उच्च वर्ग में पैदा होने वाला गरीबों के लिए कोई सुविधा नहीं, कोई आरक्षण नहीं। यह अन्याय हमारे कई गरीब भाई-बहनों के साथ इस स्वतंत्र भारत में हो रहा है। गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आति फिर आरक्षण जाति के आधार पर क्यों? यह सवाल देश की बड़ी संख्या में लोग उठा रहे हैं। इस आरक्षण की वजह से ही कई कार्यालयों में आपस में तनाव बना रहता है। और जिस अधिकारी का प्रमोशन बावजूद निम्न स्तर होने के जाति के आधार पर हो जाता है तब वह एक तरह के घमंड का शिकार हो जाता है और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों से कलह का कारण भी बनता है।
जहां तक इन आरक्षित जातियों का एक निश्चित कोटा रखने का सवाल है उस पर भी यह शिकायत होती है कि इसमें आरक्षित गरीब अपनी गरीबी के कारण यह लाभ नहीं ले पाते और कुछ अमीर आरक्षित कोटा को पूरा न कर पाने के कारण सभी के लिए रास्ता बंद कर देते हैं। आरक्षण का कोई पैमाना अभी तक नहीं बन पाया है जिसके कारण इसमें धांधली भी होती रही है। हमारे समाज में उच्च जाति के बहुत से परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं जिन्हें भीख मांगना भी नही आता और उन्हें आरक्षण के कारण सरकारी कोई लाभ भी नही मिल पाता है।
अब आरक्षण से पैदा हुई तमाम खामियों को दूर करने का एक सरल और सही उपाय तो यही है कि सभी गरीबों को आरक्षण मिले और किसी जाति विशेष को आरक्षण न मिले। अब इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि स्वतंत्रता के बाद से सभी जातियों में अमीरी का ग्राफ भी ऊपर आया है और इस तरह सिर्फ जाति विशेष में आरक्षण के कारण कुछ अमीर परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। इस आरक्षण से गरीब परिवारों को कोई फायदा नही हो रहा है।
हम आशा करते हैं कि सरकार किसी जाति विशेष के बजाय सभी जाति धर्मों के गरीब परिवारों को आरक्षण देगी जिससे सभी गरीबों का कल्याण हो पाऐगा और अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है तो इससे किसी जाति विशेष को एतराज नहीं होना चाहिए। समाज सभी के विकास और कल्याण से बनेगा और जातियों में खाईयां बनाने के बजाय एक दूसरे के सहयोग करने से संवरेगा।
अब अंत में हम यही कह सकते हैं कि सरकारें अपने राजीतिक लाभ लेने के चक्कर को छोड़कर बिना किसी भेदभाव के ऐसा कानून बनाऐं जिससे गरीब परिवारों को सीधे लाभ मिल सके। हम आशा करते हैं कि सभी राजनीतिक दल इस विषय को अपने घोषणा-पत्र में मुख्य स्थान देंगे।
धन्यवाद।
-मो. इस्माईल, एडीटर