अमेरिका पर हिरोशिमा और नागासाकी की तबाही का कलंक

प्रिय पाठको, आज भी दिल डर जाता है जब नागासाकी और हिरोशिमा की घटना को याद करते हैं। कितना अमानवीय कृत अमेरिका ने किया जो बेकसूर जनता पर परमाणु बम गिराया। अमेरिका के तत्कानीन राष्ट्रपति हैरी टुªमेन ने हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराने का आदेश दिया। 6 अगस्त सन 1945 की सुबह को याद करते हैं जब जापन के शहर हिरोशिमा में अमेरिका ने परमाणु बम डाला था। सुबह सारे लोग अपने काम में लगे थे जो इस कहर से अंजान थे। यह बम इतना शक्तिशाली था कि जिससे 13 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत इमारतें नष्ट हो गई और लगभग 1,18,661 लोगों की जाने चली गई। यह पहला हमला था और इसके बाद 9 अगस्त को अमेरिका ने फिर जापान के नागासाकी शहर को लक्ष्य बनाकर परमाणु बम डाला जिससे लगभग 74 हजार लोगों की जाने गई और इतने ही लोगों के घायल होने की ख़बर आई।
इतिहास तो लिखा जा चुका है और बेकसूर लोगों की बेवक्त जीवनलीला भी समाप्त हो गई। ख़ानदान मिट गए। अब सवाल यह उठता है कि इन परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रोक क्यों नहीं लगाई गई। आज यही हाल सीरिया का है जहंा रूस वहां के बेकसूर लोगों पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं। यह कहां की इंसानियत है।
आज भी कई देशों के पास परमाणु बम हैं। पूरी दुनिया के देश मिलकर इन देशों पर दबाव बनाए कि वे इन्हें नष्ट करें। मानवता की रक्षा के लिए, मानवता को बचाने के लिए, इस धरती को खुशहाल बनाने के लिए सभी को आवाज उठानी होगी।
इराक का हाल हम सब जानते ही हैं कि कैसे अमेरिका ने दुनिया को गुमराह करके, झूठी ख़बर फैलाकर इराक के लोगों पर अत्याचार किए। दुनिया के देश ख़ामोश रहे। सद्दाम हुसैन की सरकार को यह कहकर समाप्त किया कि इनके देश में रासायनिक हथियार छुपा रखे हैं। दुनिया में जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं वे क्या कर रहे हैं। वे क्यूं इन्हें रखे हुए हैं? क्या वे भी किसी पबाही के लिए तैयारी कर रहे हैं। लगता तो ऐसे ही है।
अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, भारत, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और इजराईल के पास रासायनिक हथियार हैं। हमें समझ नहीं आ रहा है कि आज रासायानिक हथियारों के अलावा इंसान को मारने के लिए कितने आधुनिक हथियार हो गए हैं। जिस इंसान को एक पत्थर से मारा जा सकता है उसको मारने के लिए पूरी दुनिया में होड़ लगी है कि किस तरह इंसानियत को तबाह किया जाय। ठीक है, इन्हें नही समझाया जा सकता, ये करेंगे वही जो इनको समझ आऐगा। हम तो उन्हें अपने साथ बुला सकते हैं जो इंसानियत को बचाना चाहते हैं। आईए इस दुनिया में मानवता, इंसान, इंसानियत के लिए एक जुट हो जाएं।
-मो. इस्माईल