दुष्कर्म एवं छेड़छाड़ के दोषियों को नहीं मिलेगी सरकारी सुविधाएंः खट्टर

नई दिल्ली, 12 जुलाई, 2018ः हरियाणा राज्य में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने आज गुरुवार 12 जुलाई, 2018 को यह घोषणा की है कि हरियाणा में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोपियों को वृद्धावस्था पेंशन, शारीरिक अशक्तता पेंशन और ड्राइविंग लाइसेंस व हथियार रखने का लाइसेंस जैसी सरकारी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, हालांकि राशन सुविधा से उनको वंचित नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने घोषणा करते हुए यह कहा है कि दुष्कर्म के मामले में अदालत का आदेश आने तक आरोपी के लिए ये सेवाएं रद्द रहेंगी और अगर आरोपी दोषी साबित हुआ तो उसे सजा होगी तथा इन सुविधाओं के लिए कभी पात्र नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि दुष्कर्म, उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न के 50 मामले हरियाणा के जिन जिलों में लंबित होंगे वहां छह फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। श्री खट्टर ने कहा कि कक्षा नवीं से बारहवीं तक की छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने कहा, दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में बाधारहित जांच का प्रावधान हरियाणा के सभी थानों में होगा। जांच अधिकारी को दुष्कर्म के मामले की जांच एक महीने में और छेड़छाड़ मामले की जांच 15 दिनों में पूरी करनी होगी, अन्यथा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता अगर सरकार वकील के अलावा किसी अन्य वकील की सेवा लेना चाहती है तो सरकार उसके लिए 22,000 रुपये की वित्तीय सहायता देगी।
हरियाणा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा व संरक्षा के लिए एक व्यापक योजना की शुरुआत या तो 15 अगस्त को या 26 अगस्त को शुरू की जाएगी।
जहां तक सराहना या आलोचना का सवाल है, यह हमारा दायित्व बनता है कि हम अपनी राय दें और अपनी राय से जनता को अवगत कराएं। हमारी राय से इत्तेफाक रखना ज़रूरी नही। हम यह समझते हैं कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी का दुष्कर्म साबित होता है तो उसको तुरन्त सरकारी सेवा से निरस्त कर दिया जाना चाहिए और उसकेे तमाम लाभों को ज़ब्त करके उसको जेल में डाला देना चाहिए या उस पर अन्य उचित कार्यवाही की जाए।
यह खेद का विषय है कि देश में बढ़ते अपराध के कारण समाज में असुरक्षा का माहौल है। लोग दुष्कर्म को अपराध नही समझ रहे हैं जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों को न कानून का डर होता है और न नेताओं की किसी चेतावनी का डर। इसका मुख्य कारण सरकारी कर्मचारियों की सेलरी का जरूरत से ज्यादा होना है। क्यूंकि ये लोग इतना जमा कर लेते हैं, या इतनी प्रोपर्टी बना लेते हैं कि इन्हें किसी सरकारी लाभ की जरूरत नहीं पड़ती। छोटे-मोटे कारोबारी, प्राईवेट नौकरी, ठेका नौकरी वालों की तुलना में सरकारी कर्मचारियों को कई गुना ज्यादा रूपया तमाम अन्य सुविधाओं के साथ मिलता है। हम यह चाहते हैं कि सरकारें इस खाई को कम करने के लिए इनकम का एक औसत बनाएं। देखने में आया है कि सरकारें हर वित्त वर्ष में सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह तो बढ़ाती है मगर गैर सरकारी काम धंधा या रोजगार करने वालों की तरफ नहीं देखा जाता जिससे उन्हें हमेशा दोहरी मार झेलनी पड़ती है।
यह सोचने का विषय है कि अपराध कौन कर रहा है? पेट भरा हुआ शेर कभी शिकार नहीं करता, मगर पेट भरा हुआ धनपशु हमेशा शिकार करेगा और तमाम शैतानी काम करेगा।
हम आशा करते हैं कि सिर्फ हरियाणा सरकार ही नहीं देश में केन्द्र सरकार और अन्य राज्य सरकारें देश के नागरिकों के हित के लिए उचित कदम उठाऐंगे जिससे सही मायने में सभी सुखी रहे, सभी निरोगी रहें और सबका विकास हो।
-मो. इस्माईल