क्या इसी आजादी का सपना देश ने देखा था?

प्रिय पाठको, यह कैसी आजादी है? आज कहीं हमारे बच्चे भय में हैं, कहीं किसान आत्महत्या कर रहा है। कहीं भीड़ बच्चा चोर, गौ मांस और लव जिहाद के नाम बैकसूर मासूमों का बेरहमी से कत्ल किया जा रहा है। हमारे नौजवान ठेके की नौकरी के सहारे सरकारी कर्मचारियों की गुलामी कर रहे हैं। कहीं हमारी मां-बहनें साफ पानी के लिए लड़ रही हैं। क्या इसी आजादी का सपना देश ने देखा था? आज पत्रकार की कलम बिक गई जिस का भाता खाता उसी का गीत गाता। चाहे वह देख रहा है कि गलत है तब भी अन्याय के पक्ष में खड़ा है। झूठ को सच बना कर दिखाया जा रहा है। घृणित कार्य को समाज से छुपाया जा रहा है ताकि अपराधी बच जाए। आज सब जगह गैंग चल रहे हैं झूठों का गैंग, आरोपियों का गैंग, चारों का गैंग, लूटेरों का गैंग।
आज सत्ता में भी एक गैंग है जो देश की कम अपनों की ज्यादा सोच रहा है और यह माहौल बनाया जा रहा है कि जिस की लाठी उसी की भैंस। यह कैंसी आजादी है? कैंसा प्रजातंत्र है? जिधर देखों तरह’-तरह के भिखारी… पेट फट रहा है तब भी और चाहिए। देखिए तो सही पेट पर पत्थर बंाधकर योगा करो, बिना नहाए स्वच्छ हो जाओ और दाल में खूब पानी मिलाकर सूप बनाकर पियो सेहतमंद हो जाओगे। कितने घृणित जुमले हैं। वाह! रे मेरे देशवासियो! अंधों में काना राजा।
प्रिय पाठकों, हालही में विश्व प्रेस दिवस पर बुद्धिजीवी पत्रकारों ने जनता के सामने अपने विचार रखे। पत्रकार अभिसार शर्मा के उद्बोधन के कुछ अंश में लिख रहा हूं उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार अलग-अलग तरीकों से पत्रकारों पर दबाव डालने का काम करती हैं। उससे जुड़ी संस्थाएं आप पर अंकुश लगाने का प्रयास करते हैं। बल्कि इसलिए भी के कुछ पत्रकार इस सरकार के सुपारी किलर बन गए हैं। इनके लिए अब भी विपक्ष से सवाल किये जाना चाहिए। देखकर हैरत होती है, जब सीनियर एंकर बहस के शो में विपक्ष से बीजेपी से भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर चढ़ाई करता है। अटैक करता है। हमला करता है। आज कुछ मीडिया के लोग असल मुद्दों से भटक कर आप या तो विपक्ष या अल्पसंख्यक या फिर पिछड़े वर्गों के खिलाफ एक प्रोपेगंडा छेड़े हुए हैं। प्रोपेगंडा शायद आप समझ गए हैं। गलत बयानी करके, गलत तस्वीर पेश करके, बाकायदा एक सन्देश दिया जा रहा है। क्या कभी आपने इतिहास में बलात्कार के आरोपियों के पक्ष में रैली देखी थी? और सबसे बड़ा झूठ, के एक गैंग रेप की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को गलत ढंग से पेश करके उसका प्रसार करना। क्यों? क्योंकि फलाना अखबार के मालिक के कुछ हित जुड़े हुए हैं सत्ताधारी पार्टी के साथ।
देश में समस्याएं हैं लेकिन कोई नेता समस्याओं को नहीं उठा रहा, कोई पत्रकार समस्याओं पर बात करने को तैयार नहीं, सभी लाभ के चक्कर देश को दाव में लगाए हुए हैं। विपक्ष भी मैदान में उतरने को तैयार नहीं। क्या देश का भविष्य ऐसे ही नाकारों से चलेगा जो मैदान में हैं ही नहीं? क्या आजादी के मतवालों ने ऐसे ही नौकारों, लूटेरों के लिए देश के लिए ख़ून बहाया था?
लोकसभा चुनाव 2019 नजदीक आ रहा है और जल्द ही चुनाव भी हो जाऐंगे। जनता बैवकूफों की तरह वोट करेगी और फिर पांच साल रोती रहेगी कि यह क्या हो गया, यह क्यूं हो गया, यह कैसे हो गया? हम यह समझते हैं कि हर राजनीतिक दल में अच्छे बुरे चरित्र वाले लोग हैं और स्थानीय क्षेत्र के नेता को आप बखूबी जानते हो, इसलिए दल को नहीं नेता के चरित्र को देखकर वोट करें। अपने नेता में देखें कि वह सभी धर्मों की इज्जत करने वाला हो, समाज और देश सेवा उसका धर्म हो।
आओ एक सुन्दर, स्वच्छ और शांतिप्रीय समाज बनाएं, अपने प्रिय नेता को वोट दें।
-मोहम्मद इस्माईल, एडीटर