सावधानी हटी, दुर्घना घटीः मौत

प्रिय पाठकों, आज विषय एक दुःख बांटने का है और इस दुःख को हलका करने के लिए यह बात लिख रहा हूं कि मौत यकीनन एक दिन को सबको आनी है मगर कुछ मौतें बहुत दर्दनाक, हार्ट अटैक, हादसे की मौत और वह भी कम उम्र में। सोमवार सुबह 28 मई को कर्नाटक विधान सभा में कांग्रेस के नये विजयी विधायक सिद्दू न्यामगोड़ा का दुर्घटना में मृत्यु हो गई और सोमवार सुबह 28 मई को ऐसा ही हमारे साथी के साथ हुआ जो हमारे साथ हमारे अख़बार से जुड़े थे। हम पूरे इस्मा टाइम्स परिवार को बहुत ही दुःख है और मृतक के परिवार के साथ सहानुभूति है, परवरदिगार इस दुःख को बरदाश्त करने की हिम्मत दे। हमें अपने साथी की मृत्यु पर बहुत दुःख है।
कुछ फिरकापरस्त लोग कहते हैं कि वह हिन्दू है, मुसलमान है, ये है वो है। हमारे साथ सभी धर्म के लोग हैं और सभी सगे भाई की तरह रहते हैं। कौन कहता है कि भाई-भाई नहीं होता, जब गुम हो जाए तो नींद उड़ा देता है।
28 तारिख सोमवार सुबह हमारे साथी मूलचंद चैहान की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। कितना आसान था यह कहना, ज़रा उनके घर जाकर देखें, उनके पीछे मां, बीबी और तमाम सगे संबंधी का क्या हाल है। इनके साथ चार लोग थे जो राजस्थान से दिल्ली वापस आ रहे थे। राजस्थान पुलिस ने बहुत ही बढ़िया काम किया जो तुरन्त हादसे की सूचना इन लोगों के परिजनों तक पहुंचायी। राजस्थान पुलिस ने पांच मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंच कर दो मृतक और दो घायल लोगों को अस्पताल ले गए और परिजनों से संबंध बनाते रहे। इन लोगों के परिजनों तक सूचना पहुंचाने या फोन लेने के लिए हमारे पास भी फोन आया।
घटना घट गई, और जो हमेशा से होता आया है अब भी वही होगा। चंद दिनों बाद सब भूल जाऐंगे, सिर्फ मृतक के परिजनों को इनकी रह-रहकर इनकी कमी याद आयेगी। प्रिय पाठको, सिर्फ एक बात कहने के लिए यह सारी भूमिकाएं कर रहा हूं कि सावधानी बरतें, अच्छे पुण्य के कर्म करें, किसी का दिल न दुखाएं।
एक इंसान की बुराई, बदकारी की सज़ा कहां गिरती है वह समझना चाहिए। मेरे प्यारे पाठको, आज जितनी सुविधाएं है वे हमारे लिए मौत के साधन बनकर आई हैं। एक साथ तबाही ला रहे हैं। और इनके बिना कोई चारा भी नहीं। गाड़ी, कार, ट्रेन, हवाई जहाज, बुलेट ट्रेन मतलब जितनी तेज उतनी तेज मौत। सावधानी खुद के लिए भी दूसरों के लिए भी जरूरी है।
सरकार जगह-जगह होर्डिन्ग लगाती है। जल्दी से देर भली, घर में कोई तुम्हारा इंतजार कर रहा है। मोबाईल पर बात करके ड्राईविंग न करें। शराब पीकर गाड़ी न चलाएं। ड्राईवर से बातें न करें। ड्राईवर के पास न सोएं, इत्यादि। आखिर किसे समझाएं, हम मौत को दोष देते हैं कि मौत तो आनी है लेकिन यह भी तो हमारे अच्छे कर्मों से मौत टल भी तो सकती है। क्या भगवान निर्दयी है? क्या भगवान ने हम सबको गाजर मूली की तरह कटने के लिए पैदा किया है?
आज पूरी दुनिया एक असाधारण सुःख को देखकर भविष्य के डर को अनदेखा करके जी रही है। जिसके पास धन है वह धन को नहीं खा रहा है जिसके पास नहीं है वह धन के लिए रो रहा है। आखिर शांति कहां है?
क्या-क्या सोचा था, ये करेंगे, ये बनाऐंगे, ये होगा, और वह होगा, मेरे दोस्त अब क्या होगा। वह जमाना कितना अच्छा रहा होगा जब लोग सिर्फ बिमारी से ही मरते रहे होंगे। शायद इसी लिए उन लोगों की उर्मे लम्बी होती थीं। आज हमारे दिमाग में ज़हर है, धुंवा है, प्रदूषित फल, सब्जी, दूध, अनाज, तेल है। क्यूंकि सब तेजी से धनवान होना चाहते हैं उसके लिए मिलावट, रिश्वत, बेईमानी, दगाबाजी जो भी हथकंडा हो सकता है उसे अपना लेते हैं। देशों को धनवान होना है, तेल, गैस, रसायन का भण्डार करना है। इसके लिए बेकसूरों का ख़ून करो। मेरे पास शब्द नहीं हैं कि इन एजेंसियों को क्या नाम दिया जाए जो मानवाधिकार के लिए बने हैं। इंसानियत को बचाने के लिए, इस धरती को बचाने के लिए बनाए हैं। लगता है यह भी एक धंधा है।
हम सब सभ्य लोग किन जानवरों की श्रेणी में आ रहे हैं जो देख रहे हैं, समझ रहे हैं कि दुनिया एक आग के गोले के ढ़ेर पर बैठी है। अभी ट्रम्प और किम मिलने वाले हैं देखते हैं ये दोनों क्या गुल खिलाते हैं।
हमने दुनिया को एक कुटुम्ब माना है और इस कुटुम्ब के सभी सदस्यों के लिए शांति, सुरक्षा, रोटी, कपड़ा, मकान हम सब की सामुहिक जिम्मेदारी है। आईए मानवता केे लिए एक जुट हो जाए।
– मो. इस्माईल