लखनऊ में ‘‘सेफ ब्लड ट्रांसफ्यूजनः नीड आॅफ आॅवर’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन

लखनऊ, 3 मई, 2018ः आज दिनांक 03 मई, 2018 को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा ‘‘सेफ ब्लड ट्रांसफ्यूजनः नीड आॅफ आॅवर’’ विषय पर एक सतत् चिकित्सा कार्यक्रम का आयोजन अटल बिहारी बाजपेई साईंटिफिक कंवेंशन सेंटर में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमति रीता बहुगुणा जोशी, मा. मंत्री महिला एवं परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण विभाग एवं पर्यटन विभाग के कर कमलों द्वारा किया गया। मा. मंत्री जी ने कहा सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन अत्यंत ही महत्वपूर्ण है और हमे यह इसके लिए अस्वस्त होना पड़ेगा की मरीजों को जो रक्त चढ़ाया जा रहा है वो संक्रमण मुक्त होना चाहिए। हमे ब्लड ट्रांसफ्यूजन में इथिक्स को अपनाना चाहिए। उत्तर प्रदेश और बिहार में रक्त की बहुत ज्यादा आवश्यकता है जिसको पूरा करने के लिए हमंे विभिन्न तरह के प्रयास करने पड़ेंगे। कार्यक्रम में मा. कुलपति प्रो. मदनलाल ब्रह्म भट्ट जी ने कहा कि 70,000 यूनिट रक्त प्रत्येक वर्ष चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा एकत्रित किया जाता है। जिसका नेट टेस्ट करने पर 6-7 करोड़ रूपये का खर्च आता है। इसके लिए हमें एन.एच.एम. के माध्यम से काफी सहयोग प्रदान किया जाता है। विश्वविद्यालय द्वारा थैलेसिमिया जैसे असाध्य रोगियों के लिए निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है किन्तु हम चाहते है अन्य मरीजों को भी निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा सके इसके लिए हमें एन.एच.एम. और सरकार की तरफ से और मदद चाहिए।
उपरोक्त सतत् चिकित्सा कार्यक्रम में ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्षा डाॅ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि यदि रक्त जीवन देता है तो जीवन ले भी सकता है। यदि किसी एनेमिया के मरीज को संक्रमित रक्त चढ़ा दिया जाए तो उस मरीज के साथ उसके पूरे परिवार को संक्रमण हो सकता है और मरीज की जान भी जा सकती है। रक्त के चार कम्पोनेंट होते हैं तथा किसी भी कम्पोनेंट से संक्रमण हो सकता है। इसके लिए जरूरी है किसी भी तरह के ब्लड ट्रांसफ्यूजन को बिना नेट टेस्ट के प्रयोग न किया जाए। विभाग द्वारा 2012 से मरीजों को नेट टेस्ट किया हुआ रक्त उपलब्ध करया जा रहा है। वर्तमान में जो रक्त एकत्रित किया जा रहा है उसमंे हमने देखा कि हेपटाईटिस ए और बी से संक्रमित रक्त का ग्राफ काफी कम हुआ किन्तु एच.आई.वी. संक्रमित रक्त का ग्राफ बढ़ा है। पहले पूरे वर्ष में 3 या 5 एचआईवी संक्रमित रक्त मिलता था किन्तु 2017 में 11 यूनिट एचआईवी संक्रमित रक्त हमंे प्राप्त हुआ था। इस प्रकार हम कह सकते है कि एचआईवी संक्रमित लोग बढ़ रहे है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन से सीधे एचआईवी का ख़तरा रहता है यदि मरीज को चढ़ाया जाने वाला रक्त संक्रमित हो।
उत्तर प्रदेश में अभी नेट टेस्ट की सुविध सरकारी संस्थानों में के.जी.एम.यू. और एस.जी.पी.जी.आई. में उपलब्ध है। अन्य ब्लड बैंको में अभी एलाइजा टेस्ट ही किया जा रहा है। चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा बिना अमीर-गरीब का भेद किए सभी को सबसे सुरक्षित रक्त प्रदान किया जा रहा है। थैलेसिमिया और एचआईवी पीड़ितों को निःशुल्क रक्त प्रदान किया जा रहा है। बाकी मरीजांे को भी प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार और सहयोग प्रदान करें तो हम सभी को निःशुल्क रक्त प्रदान कर सकेंगे। विभाग द्वारा अभी तक एलाइजा टेस्ट के बाद 3 लाख 10 हजार यूनिट रक्त का नैट टेस्ट किया जा चुका है जिसकी वजह से इन रक्त यूनिटो में से 2300 संक्रमित रक्त को पकड़ा कर उसके खत्म किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त उपरोक्त सत्त चिकित्सा कार्यक्रम में नेट पीसीआर के साथ सुरक्षा, दक्षता और विश्वसनीयता के संदर्भ में डाॅ. लिजा पैट, यू.एस.ए., नैट को प्राईवेट क्षेत्र में लागू किया जाए के विषय पर डाॅ. संगीता पाठक, प्रमुख मैक्स सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल नई दिल्ली द्वारा एवे इम्यूनोहिमैटोलाॅजी रक्त सुरक्षा का एक विकासशील पहलू विषय पर डाॅ. मीनू बाजपेई, आईएलबीएस नई दिल्ली द्वारा व्याख्यान दिया गया एवं डाॅ. संगीता पाठक, डाॅ. विरेन्द्र आॅतम, विभागाध्यक्ष, मेडिसिनि विभाग, के.जी.एम.यू., डा. अर्चना कुमार, बाल रोग विभाग, के.जी.एम.यू., डाॅ. ए.के. त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, क्लीनिकल हिमैटोलाॅजी विभाग, डाॅ0 अमरेश बहादुर सिंह, श्री टोनी हार्डिमन द्वारा पैनल डिस्कसन किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के तौर पर श्री पंकज कुमार, प्रबंध निदेशक, एन.एच.एम. उत्तर प्रदेश उपस्थित रहे।