उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री श्री मोहसिन रजा और प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार शारिब रदौल्वी के हाथों सोहेल ककोर्वी की किताब ‘‘रेमनेन्ट्स ऑफ गालिब’’ का विमोचन

लखनऊ, 8 अप्रैल 2018ः प्रेस क्लब लखनऊ में अर्जियाते गालिब या गालिब एक उत्तरकथा या रेमनेन्ट्स ऑफ गालिब का इज्रा कद्दावर शख्सियतों ने किया। प्रोफेसर शारिब रुदौलवी, प्रोफेसर शाफे किदवई, प्रोफेसर अली खान मेहमूदाबाद, सुरेन्द्र विक्रम साहब, संतोष वाल्मीकी जॉर्नलिस्ट और उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की चेयरपर्सन पद्मश्री डॉ असाफा जमानी की मौजूदगी खुद किताब के लिए सनदे ऐतबार थी। जहाँ किताब को इन सब महान विभूतियों ने कामयाब कोशिश करार दिया। अदबी संस्थान ने जलसा मुनअकिद किया और उसके सदर शायर तरुण प्रकाश ने स्वागत के लिए शब्दों के फूल बिछा दिए। संयोजक अनवर हबीब अल्वी ने उनको समेट कर शुक्रिये का गुलदस्ता बना दिया।
आलमी शोहरत याफ्ता शायर टीवी प्रेसेंटर हसन काजमी ने न सिर्फ खूबसूरत संचालन किया बल्कि अपनी दीनशीन आवाज में गालिब की जमीनों में मेरी दो गजलें भी पढ़ीं जिसपर मौजूद सामईन झूम उठे। उनकी नागमबार आवाज का जादू रूह पर चल गया। हसन काजमी के हवाले से ये बात यहाँ कहना मुनासिब है कि अगर कोई शख्स किसी की खुशी में दिल से शामिल होता है तो वो रास्ते इस तरह बनाता है की हैरत होती। एक तरफ मेरे कुछ ऐसे ताल्लुक वाले एक बहोत बेहकीकत तकरीब में गए थे और दूसरी तरफ हसन काजमी का जश्न 7 अप्रैल अलीगढ में था। उन्होंने वहां अपने सम्मान में हुए जैसे में 10 बजे रात तक शिरकत की और सुबह 9.30 बजे उन का फोन आया की वो लखनऊ आ चुके हैं और बहरहाल वो जैसे में आये हसन काजमी रूहानी हवाले से मेरे पीर भाई हैं और जो लोग तकरीब में गए थे वसो भी उसी रूहानी सिलसिले से वाबस्ता है और उनकी शख्सियत जीरो होती अगर वो मेरे हलके से न जुड़े होते जो हसन काजमी ने कर दिखाया। वो मुश्किलतरीन काम था और जहाँ वो लोग गए थे वो करीब का शहर था और हसन उससे दूर गए थे। दुआ है कि वो लोग जल्द मेरे हल्के से हट जाएँ मैं खुद नहीं हटाऊँगा। मेरे नौजवान साथियों में अब्दुल वली अंसारी, मोहम्मद यासिर, रिजवान हैदर, सैफ खान, इरशाद अली, अल्ताफ किंग खान, अब्दुल्लाह मौजूद थे जिनके दिल में मोहब्बत होती है वो ऐसे ही होते है जिसका इन लोगों ने सुबूत दिया और कन्वीनर के लिए मददगार साबित हुए। कोशिश करूँगा की किताब जल्द सब के पास पहुंचे।
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री श्री मोहसिन रजा ने अपनी तकरीर में उर्दू की मिठास और उसके हिदुस्तानी मिजाज के हुस्न का जिक्र किया। इस किताब में शायद पहली बार हुआ है कि फेसबुक पर अलग-अलग गजलों पर जो कमैंट्स आये थे और उनमंे गालिब का हवाला था उनकी इमेज बनवा कर मैंने उसे किताब का हिस्सा बना दिया है क्योंकि फेसबुक एक बहोत ताकतवर सोशल मीडिया है।
जो लोग अपनी मसरूफियत के चलते वहां आये मैं सब का शुक्रगुजार हूँ और उनसे दरख्वास्त है कि वो दुआ करें कि खुशी के इस दौर में मेरे दिल में खुदा का खौफ और बढ़े। ये किताब मैंने अपने अजीजतरीन भांजे सुबूर उस्मानी आई आर ऐस को डेडिकेट की है।
ओवैस सम्भली, हसीन कवर के साथ किताब उनके नोमानी प्रेस में छपी है लेकिन वो जैसे में सिर्फ मेरी मोहब्बत में जैसे के मुन्तजिम रहे।
प्रेषकः अफजल अली शाह मदूदी