धार्मिक नेता शांति स्थापना और सदभावना के लिए काम करें

प्रिय पाठकों, राजनीति भी क्या चीज है जिसमें हर आदमी कूदना चाहता है। जहां तक धार्मिक नेताओं का सवाल है, वे आज कल राजनीति में ज्यादा से ज्यादा अपना भविष्य चमकाना चाहते हैं। भारतीय राजनीति में धार्मिक नेताओं का आना इसलिए बहुत ख़तरनाक है क्यूंकि हमारे देश के लोगों की आस्था धर्म के प्रति बहुत ज्यादा है। देश में आज तक जितने भी साम्प्रदायिक दंगे हुए उनमें धर्म का बहुत बड़ा हाथ रहा है।
धर्म का राजनीतिकरण देश का दुर्भाग्य है और देश के भविष्य और विकास में असामाजिक तत्वों द्वारा धर्म का दुरूपयोग राजनीतिक नेताओं द्वारा पिछले कुछ सालों से बड़े पैमाने पर हुआ है। आजकल बाबरी मस्जिद का मुद्दा गरमाया हुआ है और इस मुद्दे में देश के प्रसिद्ध धार्मिक गुरुओं ने अपने भड़काऊ भाषणों सेे जनता के हाथांे में जलते हुए अंगारे दे रखें हैं। श्री श्री रवि शंकर जिन्होंने ने बाबरी मस्जिद एवं रामजन्म भूमि के मुद्दे में विवादित बयान दिया है। उन्होंने बयान दिया है कि भारत के 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं को 17 या 20 करोड़ मुसलमानों को ख्याल रखना चाहिए। और मुसलमानों को अपना हक छोड़ देना चाहिए। और अगर कोर्ट का फैसला किसी भी एक के हिस्से में होगा जो कि सही नहीं होगा और यह फेसला देश में सीरिया जैसे हालत बना देगा।
श्री श्री रवि शंकर को यह अच्छी तरह मालूम होगा कि मुसलमानों ने कोर्ट के फैसले को अन्तिम माना है और कोर्ट के फैसले का आदर करने को अहम माना है। मगर श्री श्री रवि शंकर को कोर्ट के फैसले पर आपत्ति है। आज देश में कई अधार्मिक संगठन देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रहे हैं इन सबके पिछले भले राजनीतिक लाभ हो, या कोई और वजह हो।
पिछले कुछ सालों में देश में अल्पसंख्यकों पर कई बहानों से जुल्म हुआ है। गौरक्षक दल, शिव सेना, राम सेना, हिन्दू युवा वाहिनी, इत्यादि साम्प्रदायिक, आरएसएस जैंसे संगठनों ने देश में माहौल को बहुत खराब किया है। हमारे देश में सदियों से सभी जाति के लोग मेल मोहब्बत, शांति, सदभाव से रहते आ रहे हैं। अचानक कुछ सालों में नफरत, घृणा, डर, असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है। बाबरी मस्जिद के ध्वस्त करने बाद देश में जो खून की होली खेली गई थी वह देश पर बहुत बड़ा दाग है। अब हमारे धार्मिक नेताओं ने फिर वही खेल खेलने के लिए गरीब जनता को मोहरा बनाकर भड़काने का काम हो रहा है जोकि एक अपराध है। सभी धार्मिक नेताओं को देश में सदभावना, एकता, अखण्डता, शांति का संदेश देना चाहिए। आज देश में असुरक्षा का माहौल है। बेरोजगारी, मंहगाई, भ्रष्टाचार ने आम जनजीवन को प्रभावित करके रखा हुआ।
बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर ही भाजपा प्रवक्ता श्री जफरूल इस्लाम ने कहा कि धार्मिक नेता बाबरी मस्जिद के मामले में राजनीति न करें। मुस्लिम समाज से भी कुछ नेता अपनी राजनीति की रोटी सेंक रहे हैं। देश की जनता लाचार जैसा हमारे राज नेता और धार्मिक गुरू कहते हैं अंधों की तरह उनके पिछे हो लेते हैं।
प्यारे पाठको, धर्म खुद अपनाने के लिए हैं, सभी धर्म के अनुयाईयों का आदर करना चाहिए। इसलिए की वे इंसान हैं। इंसानियत धर्म और राजनीति से ऊपर है। इंसानियत के लिए इंसानियत को अपनाएं। असुरक्षा और भय की जिन्दगी से मुक्ति पाएं। ईमानदार नेताओं को हमेशा चुनाव में जीताएं, देश और अपनी आने वाली पीढ़ी का भविष्य सवारें।
-मोहम्मद इस्माईल, संपादक