अन्तिम व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर सांस्कृतिक संगोष्ठी

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं भाऊराव देवरस सेवा न्यास के संयुक्त तत्वाधान में अन्तिम व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शीर्षक के अंतर्गत सांस्कृतिक संगोष्ठी का भब्य आयोजन मा0 अटल बिहारी वाजपेई कंवेंशन सेण्टर में सम्पन्न हुआ। उपरोक्त संगोष्ठी में भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय एवं सूचना विभाग के सहयोग से डाॅ0 ज्ञान आर्य के निदेर्शन में बुद्धम् थियेटर सोसाइटी द्वारा ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय: दर्शन एवं सामाजिक समरसता में अन्त्योदय की भूमिका’ विषय पर नाटक अंत का उदय का मंचन किया गया जो कि सामाजिक, राजनीतिक, एकात्म मानववाद व अन्त्योदय के प्रणेता पं0 दीनदयाल जी के संघर्षमय जीवन पर आधारित था।
उपरोक्त कार्यक्रम में मंच का संचलान कर रहे प्रो0 संदीप तिवारी, विभागाध्यक्ष, ट्राॅमा सर्जरी विभाग/संकाय प्रभारी, ट्राॅमा सेण्टर द्वारा पं0 दीनदयाल जी को कोट करते हुए कहा कि हमारी सम्पूर्ण व्यवस्था का केन्द्र मानव पर आधारित होना चाहिए। हमारा आधार एकाक मानव है हमे जीवन के सभी अवस्थाओं में विाकस करना है। यदि भारत माता से माता शब्द हटा दिया जाए तो सम्पूर्ण भारत देश एक भुखण्ड रह जायेगा। हमार गैर हिन्दु से कोइ मतभेद नही, हम उन सभी लोगो के साथ कार्यकरने के लिए तत्पर है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान दे। किसी भी राष्ट की सर्वांगीण प्रगति तभी सम्भव है जब उस राष्ट्र का हर नागरीक राष्ट्र के विकास में योगदान दे।
इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के मा0 कुलपति प्रो0 मदन लाल ब्रह्म भट्ट जी ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि इस संगोष्ठी का आयोजन भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से ‘अन्तिम व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा’ का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा अन्त्योदय योजना के अंतर्गत समाज के गरीब से गरीब लोगो तक स्वास्थ्य सेवाएं एवं मूलभूत जरूरतो को पहुंचाना है। इसे प्राप्त करने का व्यावहारिक ज्ञान पं0दीनदयाल जी ने सिखाया उन्होनें एकात्मवाद को सिखाया है। पं0 दीनदयाल जी ने कहा कि चिकित्सा के लिए पैसा देना अच्छी बात नही, चिकित्सा निःशुल्क होनी चाहिए। जब हम किसी पेड़ लगाते है उसे सींचते है तो उसके लिए पैसा नही लेते भविष्य में वह पेड़ अपने फल-फूल के माध्यम से हमे सबकुछ प्रदान कर देता है। किसी भी राष्ट्र का विकास स्वस्थ्य व्यक्तियों से ही हो सकता है। देश की 3 प्रतिशत आबादी विभिन्न बीमरियों के ऊपर खर्च से गरीबी रेखा के निचे चली जाती है जबकि इतने ही प्रतिशत अबादी प्रत्येक वर्ष विभिन्न तरह के उद्योग धन्धे और विकास से गरीबी रेखा के ऊपर जाती है। इस प्रकार बीमारियांे पर होने वाला खर्च देश के विकास मंे एक बहुत बड़ी बाधा है। यू0पी0 मे प्रत्येक वर्ष 6 प्रतिशत लोग विभिन्न प्रकार के बीमारियों पर खर्च की वजह से गरीबी रेखा के निचे चले जाते है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा जो देश के 10 करोड़ गरीब लोगो के लिए जो हेल्थ बीमा पाॅलिसी की योजना लाई है यह एक स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम है।
कार्यक्रम अध्यक्ष मा0 चिकित्सा शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री श्री आशुतोष टण्डन जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पं0 दीनदयाल जी एक महा मनीषी, महामानव थें। उनके विचार आज के समय में प्रासंगीक है। समाज के लिए चिंतन पं0 दीनदयाल जी के जीवन का स्वयं का अनुभव था। उनका विचार और उनका दर्शन का मुख्य आधार समरसता पूर्ण स्वस्थ्य समाज का निर्माण था। समाज की दो विचारधाराएं थी पूॅजीवाद और साम्य वाद। पूॅजी वाद ने समाज में गरीब और अमिरों के बीच की खाई बढ़ा दी थी। साम्यवाद के अनुसार सभी धन सरकार का होता था। जिसकी वहज से लोगो ने काम करना बंद कर दिया । तब पं0 दीनदयाल जी ने एकात्मवाद से परिचय कराया। एकात्मवाद का शाब्दीक अर्थ है मन, बुद्धि, शरीर आध्यात्म के साथ मिलकर पूर्ण होकर कार्य करना। भौतिक वाद से गाॅव टूट गया परिवर टूट गया समाजिक समरसता खत्म हो गई। सही गलत की परिकल्पना समाप्त होगई तब पं0 दीनदयाल जी ने एकात्मवाद अन्त्योदय की अवधारणा दी। उन्होंने इसके अंतर्गत समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता की। इसी अवधारणा के अंतर्गतसरकार द्वारा गरीब मरीजो के उपचार हेतु असाध्य रोग योजना, प्रधानमंत्री डायलिसिय योजना के तहत गरीबो को उपचार मुहैया कराया जा रहा है। स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रथम चरण मे देश के 40 प्रतिशत लोगो को इसका लाभा मिलेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ0 दिनेश शर्मा, मा0 उप मुख्यमंत्री, उ0प्र0 ने कहा की विश्व के पांच बड़े जनसंख्या वाले देशो के बराबर अकेले उ0प्र0 की आबादी है। उत्तर प्रदेश की आर्थिक विषमताओं के कारण सभी को चिकित्सा की सुविधाएं एवं जीवन की मूलभूत अवश्यकताओं की आसानी से पूर्ती करने में कठिनाईयां उत्पन्न हो रही है। आज भी करीब देश की 75 प्रतिशत आबदी गावों मे रहती है। जनसंख्या मे लगातार वृद्धि के कारण सुविधाओं में औषतन कमी हुई है। नई नई बीमारियां बढ़ती जा रही है। इस प्रकार हर व्यक्ति स्वस्थ्य रहे इसकी कल्पना नही हो सकती है। इस लिए बीमारी कम से कम हो इसके लिए हमे प्रयास करना पड़ेगा तथा लोगो को ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वहां पर चिकित्सकों को भेजना पड़ेगा इसके लिए जरूरी है कि वहां पर सड़क बिजली, पानी आदि की सुचारू व्यवस्था की जाएं ग्रामीण सड़कों को मेन रोड से जोड़ा जाए गाॅव की चिकित्सा व्यवस्था को सृदृढ़ करने का सरकार और गैर सरकारी स्तर पर प्रयास करना पड़ेगा। पं0 दीनदयाल जी ने जैव जमीन और जीवन में संतुलन की प्राकल्पना की थी। प्राकृतिक साधन और संसाधनों को अपनाना पड़ेगा। हमारी चिकित्सा पद्धति हमारे सोच और विचार जब विदेशो में चले जाते है तब वो महान बन जाते है। हमारे समाज की परम्परा प्राकृति निकट रहने की रही है घरो में तुलसी लागने की परम्परा रही है जिसमे विभिन्न प्रकार के औषधिय गुण भी है। आज पश्चिमी देशों मे लोग रक्त चाप समान्य करने के लिए योग कर रहे है और हम लोग विभिन्न प्रकार के मशिनों और दवाओं पर निर्भर होते जा रहे है। आज विभिन्न सरकारी अस्पतालों मे गरीबो, आसाध्य रोगियों के निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था है ऐसे ही चिकित्सा व्यवस्था सप्ताह में एक दिन उन प्राइवेट नर्सिंग होमो को भी करनी चाहिए। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार विभिन्न प्रकार के कार्य कर रही है किन्तु इस क्षेत्र मंे जो नए चिकित्सक बन रहे है उन लोगो को भी कुछ प्रयास करना चाहिए क्यूकि समाज ने आप लोगो के लिए भी बहुत कुछ किया है। आप लोगो को ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी योग्यता का लाभ पहुंचाना होगा। हमे बुराईयो को नहीं अच्छाईयों खोजना पड़ेगा। सरकार गावों में सड़को,शौचालयों, आयुर्वेद केन्द्रो, छोटे-छोटे चिकित्सालयों के निर्माण के ऊपर कार्य कर रही है।
उपरोक्त कार्यक्रम में मा0 ब्रह्मदेव शर्मा भाई जी, विशिष्ट अतिथि, प्रो0 बिन्दा प्रसाद मिश्र, पूर्व कुलपति, डाॅ0 सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वारणसी, श्री रामनिवस जैन, कोषाध्यक्ष भऊराव देवरस सेवा न्यास सहित श्री अशोक बाजपेई जी, श्री राजेश जी, एवं चिकत्सा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायो सदस्यों, विद्यार्थियों के साथ विभिन्न गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।