बड़े औद्योगिक घरानों का देश पर शिकंजा

प्रिय पाठकों, लखनऊ में हाल ही में दो दिवसीय निवेश सम्मेलन हुआ जिसमें रिलायंस, अडाणी, आदित्य बिड़ला और टाटा समूह सहित देश के कई बड़े औद्योगिक घरानों ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने का उत्साह दिखाया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे औद्योकिग विकास की राह खुलेगी, रोजगार के अवसर खुलने से बेरोजगारी में कुछ कमी आऐगी।
इस आयोजन में चार लाख अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणाएं सामने आई है। इतनी बड़ी राशि की अहमियत इसलिए है कि पहली बार किसी राज्य को अपने सालाना बजट यानी चार लाख अट्ठाईस हजार करोड़ रुपए के बराबर निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। हम सब जानते हैं कि पिछले साल नोटबंदी से कई छोटे उद्योग बंद होने से बेरोजगारी ने भयंकर रूप ले लिया है। अब जीएसटी से कई छोटे उद्योग बंद हो गए हैं। जहां तक इस सम्मेलन का सवाल है और इसमें जिन प्रस्तावों पर बात हुई उनके कार्यान्वयन से 2 लाख पच्चास हजार लोगों को रोजगार मिलने की आशा है, क्या यह काफी है?
यह विषय अलग है लेकिन सोचने की बात है कि जब देश में बेरोजगारी, भूखमरी और गरीबी बढ़ रही हो तो इसे हम कौन सा विकास कहेंगे। आपने इन औद्योगिक घरानों में जिन नामों को देखा है वे कौन हैं? देश की जनता पहले अंग्रेजों की गुलाम थी आज इन औद्योगिक घरानों की गुलाम बनने जा रही है। देश की जनता एक मूक गुलाम से ज्यादा कुछ नहीं है। जहां तक वोटर के अधिकार का सवाल है उस पर प्रश्नचिन्ह पहले ही लगा हुआ है। क्या मशीनों के साथ छेड़छाड़ संभव नही? अगर छेड़छाड़ संभव हो सकती है तो फिर इनका उपयोग बिल्कुल बंद होना चाहिए। इनका उपयोग देश की जनता के साथ धोखा है।
हमारा कहना यह है कि उत्तर प्रदेश इकलौता राज्य नहीं जहां समस्याएं हैं? वित्त वितरण में केंद्र सरकार को सभी राज्यों से समान न्याय करना चाहिए चाहे वहां गैर भाजपा सरकार ही क्यों न हो। भारत के 29 राज्यों में से 19 राज्यों में भाजपा एवं भाजपा द्वारा समर्थित पार्टियों की सरकारें हैं। जनता की राय जानने के बाद हमें यह पता चला है कि पिछले चंद सालों में देश की जनता के बीच जातियों में दरार आई है, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, घोटाले, अनिश्चितता में जो बढ़ोत्तरी हुई है उसका मुख्य कारण शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार और देश में असामाजिक तत्वों का बढ़ना है। इन असामाजिक संगठनों ने सरकार के नाक के नीचे राजनीतिक लाभ के लिए जो अराजकता फैलाई है उससे देश की बड़ी बदनामी हुई है। इसका परिणाम आगामी चुनावों पर दिखेगा। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि इससे अल्पसंख्यकों के रोजगार, कारोबार इत्यादि पर भयंकर असर पड़ा है।
भाजपा को अगर दोबारा केन्द्र में आना है तो उनके लिए अपनी गलती सुधारने का यह आखरी मौका है। केन्द्र सरकार को देशहित में कुछ कठोर कदम उठाने होंगे जिससे देश की सभी जातियों में आपस में प्रेम बढ़े, तब ही देश का असल मायने में विकास हो पाऐगा। जब देश के अंदर अशांति, अराजकता, भ्रष्टाचार, चोरबाजारी, जमाख़ोरी, भाई-भतीजावाद, लूट, औरतों की बेईज्जती, आय में असमानता रहेगी तो देश कभी विकास नहीं कर सकता।
प्यारे पाठको, ईमानदार नेताओं को हमेशा चुनाव में जीताएं, देश और अपनी आने वाली पीढ़ी का भविष्य सवारें।
-मोहम्मद इस्माईल, संपादक