कासगंज दंगा पर जमाअत इस्लामी हिन्द की प्रेसवार्ता

नई दिल्ली, 3 फरवरी 2018ः जमाअत इस्लामी हिन्द ने 3 फरवरी 2018 को कासगंज में 26 जनवरी को हुए सांप्रदायिक दंगा और बजट 2018-19 को लेकर एक प्रेसवार्ता अपने कार्यालय बुलाई। इस वार्ता में मुख्य रूप से कासगंज सांप्रदायिक दंगा पर बात हुई। इसमें विभिन्न मीडिया हाउस से प्रेस प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिसमें पुलिस एवं राज्य सरकार की भूमिका पर खेद व्यक्त किया गया।
जमाअत इस्लामी हिन्द ने कासगंज में फासिवादी और सांप्रदायिक ताकतों के ज़रिए मुसलमानों के खिलाफ सुनियोजित हिंसा की निन्दा की। जमाअत ने हिंसा में मारे गए व्यक्ति के प्रति अफसोस प्रकट किया और मृतक के परिजनों के साथ संवेदना व्यक्त किया। असामाजिक तत्वों ने मुस्लिम इलाकों में तिरंगा फैराने को लेकर मुस्लिम इलाके में साम्प्रादायिक हिंसा, अपशब्दों का इस्तेमाल, उत्तेजक नारे लगाए। जमाअत ने कहा कि हिंसा और आगजनी को स्थानीय पुलिस द्वारा रोका जा सकता था लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो शहर के शांत वातावरण को बिगाड़ना चाहता हो। जमाअत मुस्लिम युवाओं की गिरफ्तारी को लेकर चिन्तित है। ऐसा लगता है कि राज्य प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रही है।
उत्तर प्रदेश खासकर कासगंज दंगा को लेकर जमाअत ने मुस्लिम संगठनों के कुछ नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल ने 30 जनवरी को दंगा ग्रसित इलाके का जायजा लिया। स्थानीय लोगों से बात करने पर उन्होंने प्रेसवार्ता में यह बात बताई की हमने सबको शांति बनाये रखने के लिए कहा और असामाजिक तत्वों को और दंगा, आगजनी करने वालों पर कार्रवाई हो। उन्होंने एसआईटी पर हमें इत्मिनान नहीं है। सरकार के महज ऐलनात करने से कुछ नहीं होने वाला। शिक्षा के लिए बच्चों को बगैर ब्याज वाला लोन दिया जाना चाहिए।
राज्यसभा में कासगंज को लेकर बड़ी बहस हुई और सदन की कार्रवाई में बाधा हुई। बजट पर जमाअत इस्लामी हिन्द ने कहा कि यह बजट स्पष्ट योजना और वीजन लाने में असफल साबित हुई है। इस बजट में देश के नौजवानों की शिक्षा और रोजगार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस बजट से किसान, मध्यमवर्ग खुश नहीं हुए। जमाअत उम्मीद करती है कि सरकार उन सभी योजनाओं का विवरण उपलब्ध कराएगी जिसकी घोषणा उसने बजट 2017-2018 में की थी।
राजस्थान के चुनावों नतीजे पर एक पत्रकार ने सवाल किया तो जमाअत ने कहा कि वहां लोगों की नाराज़गी कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा है। भारी अंतर से भाजपा की हार भाजपा के लिए बहुत ही चिन्ता का विषय है।
हमें यह लगता है कि कासगंज से देश के फिरकापरस्त देश को एक संदेश देना चाहते हैं कि हम जैसा चाहेंगे वैसा हम कर लेंगे। मगर शायद इन्हें यह मालूम नहीं है कि सबका मालिक एक है। इसलिए मालिक ही हम सबका रखवाला भी है, हिफाजत करने वाला भी है, पालने वाला भी है, मारने वाला भी है, इसलिए सबको ऊपर वाले के कानून से डरना चाहिए। हम नौजवानों से अपील करते हैं कि वे अपनी आवरगी से अपने परिजनों को दुःखी न करें। हमें कासगंज और देश में घटने वाली तमाम घटनाओं पर तमाम राजनीतिक दलों की चुप्पी की निंदा करते हैं। ये दल भाजपा की मनमानी का राजनीतिक लाभ लेने के लिए मौन धारण किए हुए हैं जिसका नुकसान देश की जनता उठा रही है।