स्वास्थ्य सेवाओं पर जीएसटी का प्रभाव

नई दिल्ली 10, 2018 – जीएसटी लागू होने से हेल्थकेयर इंडस्ट्री पर खास तौर से सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है. हेल्थकेयर सेक्टर के दायरे में फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों से वस्तुओं की सप्लाई और हॉस्पिटल, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि से सेवा की आपूर्ति दोनों शामिल हैं. इन वस्तुओं या सेवाओं के खर्च में किसी तरह की वृद्धि का सीधा असर दिन-प्रतिदिन आधार पर उपभोक्ताओं पर ही पड़ता था और इससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई एक सीमा के अंदर ही अब रहेगी.

एकेजीवीजी एंड एसोसिएट्स के मैनेजिंग पार्टनर एफसीए के विनीत गुप्ता का कहना है कि, ‘सभी करों को एक ही कर ढांचे में समाहित करने का लक्ष्य देश में कारोबार को बढ़ावा देना और इसके तौर-तरीके आसान हो रहा है. जीएसटी लागू होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रगति के साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम जल्द ही इस क्षेत्र में आश्चर्यजनक वृद्धि की अपेक्षा कर रही है. फार्मा इंडस्ट्री में सीएसटी (केंद्रीय बिक्री कर) खत्म होने से इसमें सभी तरह के खर्च कम होने की उम्मीद है. जीएसटी लागू होने से इस उद्योग के लिए सप्लाई चेन की रणनीति बनाने तथा पुनर्गठित करने का एक बड़ा अवसर नजर आ रहा है, जबकि साथ ही इसे मैन्युफैक्चरिंग खर्च में कटौती का भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा.’

जीएसटी हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में संपूर्ण खर्च कम करते हुए कई तरह के भविष्य में लाभ देगा. इससे पहले की व्यवस्था में उन्नत मशीनरियों तथा डायग्नोस्टिक उपकरणों के लिए बहुत ज्यादा टैक्स और शुल्क देना पड़ता था, जिससे इनका आयात करना बहुत महंगा पड़ जाता था. इसके अलावा पूर्ववर्ती कर नियमों के तहत निर्धारित शुल्क पर टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता था. जिसका प्रावधान अब जीएसटी के तहत उपकरणों और मशीनरियों के आयात के लिए जरूरी किया गया है. इसका नकारात्मक असर संभवत: एक्स-रे और एमआरआई जैसी रेडियोलॉजी मशीनरियों पर देखा जा सकता है, लेकिन इसका स्पष्ट असर जानने के लिए अभी डायग्नोस्टिक उद्योग की निगरानी की जा रही है.’

भारत 2020 तक मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनने की तैयारी में है जिसकी संभावनाएं बढ़ाने में अब जीएसटी की अहम भूमिका होगी क्योंकि इस वजह से सेवा गुणवत्ता से समझौता किए बगैर बीमा खर्च, फार्मास्यूटिकल और यात्रा खर्च में कमी आएगी. यात्रा खर्च से लेकर ई-वीजा ऑन एराइवल और ठहरने तथा इलाज तक के संपूर्ण हेल्थकेयर पैकेज अब किसी भी विकसित देश की तुलना में 10 प्रतिशत कम दर पर उपलब्ध हो गई है, इससे भारत को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा.

नोटबंदी के बावजूद देश के मेडिकल टूरिज्म में न सिर्फ  तीव्र तरक्की देखी गई, बल्कि इसके बाद पहले के मुकाबले और ज्यादा राजस्व तथा रोजगार सृजन हुआ है. इसके अलावा आयुष मंत्रालय ने भी विदेशी मरीजों को आकर्षित करने के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. एशिया के प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले यहां वैकल्पिक उपचार मुहैया कराने की सुविधा एक महत्वपूर्ण आकर्षण है जबकि जीएसटी लागू होने से मेडिकल टूरिज्म के विकास में इस सेक्टर पर सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है.

सीए विनीत गुप्ता के मुताबिक, जीएसटी के तहत संबंधित क्षेत्रों की हेल्थकेयर सेवाएं सप्लाई छूट के दायरे में शामिल हो गई हैं और इस कानून के मुताबिक यदि आउटपुट सप्लाई छूट के दायरे में आती है तो इनपुट टैक्स क्रेडिट लागू नहीं होता है. इससे अस्पतालों जैसी हेल्थकेयर सेवाओं द्वारा ली जाने वाली इनपुट सेवाओं पर लगने वाले सभी कर (जो अब लागत का हिस्सा हो गया है) अंतिम सेवा आउटपुट में शामिल हो गए हैं. विनीत गुप्ता के अनुसार ‘जीएसटी के ढांचे में वस्तुओं और सेवाओं की इनपुट सप्लाई पर या तो कर लागू होना चाहिए या एकमुश्त क्रेडिट का रिफंड पाने के लिए हेल्थकेयर सेवाओं पर 3 से 5 प्रतिशत का कर लगाया जाना चाहिए. यह व्यवस्था लागू होने से हेल्थकेयर सेक्टर को बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा और बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा.’