दिल्ली कमेटी ने चार साहिबजादों को समर्पित करवाया राष्ट्रीय सम्मेलन

नई दिल्ली (16 जनवरी 2018)ः आज चार साहिबजादों को समर्पित दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन विज्ञान भवन मंे करवाया गया। जिसमें शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, केेन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तथा इंडिया टी.वी. के चेयरमैन रजत शर्मा ने मुख्य मेहमान के तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में साहिबजादों की शहादत के इतिहास को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। लोक सभा सदस्य प्रेम सिंह चंदूमाजरा, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह, पंजाबी विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा. जसपाल सिंह तथा पूर्व सांसद विजय कुमार मल्होत्रा ने दिल्ली कमेटी द्वारा शहादतों के इतिहास को प्रचारित करने के लिए उठाये जा रहे कदमों की प्रशंसा की।

स्मृति ईरानी ने कहा कि साहिबजादों की शहादत का इतिहास रोेंगटे खड़े करने वाला है। वीरता तथा समर्पण की इस भावना का प्रचार तथा प्रसार जरूरी है। गुरू गोबिन्द सिंह जी पिता होने के बावजूद अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए अपने पुत्रों को युद्ध के मैदान मंे भेजने की हिम्मत दिखाते हैं। जो इन्सान इस इतिहास को सुनकर भावनात्मक ना हो वह इन्सान ही नहीं है। पूरा देश और संसार आज वीर पुत्रों की इस शहादत को याद कर रहा है। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का इतिहास हर धर्म तथा समुदाय के नौजवानों तक पहुंचाने की अपील करते हुए कहा कि साहिबजादों की कुर्बानी नौजवानों को देश तथा धर्म के लिए शहीद होने का संदेश देती है। इसलिए संचार मंत्री होने के नाते टी.वी. तथा रेडियों के माध्यम से इस विलक्षण इतिहास को मैं एक मंत्री, एक मां तथा देश की नागरिक होने के नाते प्रचार करने का संकल्प लेती हूं।

सुखबीर बादल ने सिख कौम की आबादी तथा शहीदों की तुलना करते हुए कहा कि सिखों ने पूरी दूनिया मंे नाम कमाया है। उन्होंने अपने लोकसभा सदस्य रहने के दौरान स्पीकर बालयोगी के साथ मंगोलिया की गई यात्रा का जिक्र किया। कहा कि सिख हाथ नहीं फैलाता बल्कि मेहनत करके खाता है। अगर आजादी देश ने प्राप्त की तो सबसे अधिक कुबार्निया सिखों के हिस्से आई। आजादी के बाद आपात काल में भी 60 हजार से अधिक अकालियों ने जेल काटी। अकाली दल कौम की नुमांईदा जत्थेबंदी है। संसार मंे कुछ भी हो सबसे पहले सिखों की बात अकाली दल करता है। अकाली दल के पंजाब मंे राज के दौरान धर्म तथा विरासत को संभालने के लिए दो हजार करोड़ रूपये खर्च करने का दावा करते हुए बादल ने धर्म को संभालने के लिए सियासत तथा राज को जरूरी बताया। बादल ने सिख इतिहास को धारावाहिक के रूप मंे दूरदर्शन पर चलाने की स्मृति को अपील करते हुए बताया कि चार साहिबजादे फिल्म पंजाब सरकार ने अपनी प्रचार वैनों के जरिये 12 हजार स्कूलों में दिखाई थी। बादल ने दिल्ली कमेटी को ऐसे विचार सम्मेलन अन्य शहरों में करने की भी हिदायत दी।

रजत शर्मा ने चमकौर की लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत इतिहास पढ़ा है पर एक पिता के द्वारा अपने पुत्रों को स्वयं तैयार कर युद्ध मंे शहादत देने के लिए भेजना विलक्षण इतिहास है।

नौजवानों को साहिबजादों से शिक्षा लेने की अपील करते हुए शर्मा ने कटाक्ष भी किया। शर्मा ने हर कोई चाहता है कि बलिदानी पड़ोसी के घर जन्म ले। आज समाज को सीखने तथा बदलने की जरूरत है। प्रधानमंत्री को चाहिये कि हर समय देश की 50 फीसदी आबादी को युवा बताते हुए नौजवानों को समझायें कि अगर पिता हो तो गुरू गोबिन्द सिंह जैसा और संतान हो तो चार साहिबजादों जैसी। चार साहिबजादों के इतिहास पर इंडिया टी.वी. द्वारा फिल्म बनाने का ऐलान करते हुए शर्मा ने कहा कि आज सम्मेलन के जरिये जो लौ जली है। वो जल्द सूर्य की रौशनी बन जाये इसके लिए प्रार्थना करें।

कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने महान दार्शनिक मार्शल टीटो द्वारा 1960 में जवाहर लाल नेहरू को चमकौर की गढ़ी दिखाने की गई अपील का जिक्र करते हुए कहा कि सिख बच्चों को भुजंगी कहने के पीछे साहिबजादों का बड़ा हाथ है। सरहिन्द के नवाब ने दरबार मंे सुच्चानंद ने छोटे साहिबजादों को सांप के बच्चे बताया था। जिसके चलते आज भी सिख बच्चों को भुजंगी कहने की परम्परा है।

महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने स्टेज सचिव की सेवा निभाते हुए सिख इतिहास से सिलसिलेवार हवाले दिये। सिरसा ने कहा कि साहिबजादों की शहादत को भूलने वाले कभी भी इन्सानियत के पैरोकार नहीं हो सकते।

चंदूमाजरा ने लोकसभा में साहिबजादों के शहीदी दिवस के अवसर पर अपने दिये गये भाषण का हवाला देते हुए कहा कि देश का इतिहास दुबारा लिखने की मांग की। प्रवेश वर्मा ने जोशीला भाषण देते हुए कहा कि अगर बच्चों को चार साहिबजादों का इतिहास बताया जायेगा तो उनमंे शारीरिक तथा मानसिक ताकत पैदा होगी। चार साहिबजादों की कहानी का प्रचार समाज मंे पैदा हो रहे  समलिंगी समाज के उभार को रोकने का भी कारण बनेगा। वर्मा ने कहा कि मेरे पिता साहिब सिंह ने सज्जन कुमार की राजनीति खत्म की थी। इसलिए मेरी पूरी कोशिश है कि 22 दिसम्बर को बड़े साहिबजादों के

शहीदी दिवस पर पूरा देश बाल दिवस मानयें। हर स्कूल एवं विश्वविद्यालयों मंे बच्चों को शहादतों के इतिहास की जानकारी हो इस बात की पूरी कोशिश करूंगा। दयाल सिंह काॅलेज मामले मंे कमेटी द्वारा लड़ी गई लड़ाई को वर्मा ने कौम के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने वाली प्रभावी कमेटी के तौर पर परिभाषित किया। त्रिलोंचन सिंह ने विज्ञान भवन मंे 1999 मंे प्रधानमंत्री वाजपेयी की मौजूदगी मंे मनाये गये महाराजा रणजीत सिंह की 200वें ताजपोशी दिवस की तरह ही आज के सम्मेलन को एतिहासिक बताया। डा. जसपाल सिंह ने चार साहिबजादों की शहादत के पिछले नुक्तांे कों ब्यान करते हुए खालसा सृजना के कारण समाज में पैदा हुए बदलावों को बेबाकी से बताया। दिल्ली कमेटी द्वारा सभी मेहमानों  को सम्मानित किया गया।