शरीर के लिए प्रोटीन का महत्‍व

प्रोटीन वास्तव में एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है– सबसे जरुरी। प्रोटीन कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन एवं नाइट्रोजन तत्वों के अणुओं से मिलकर होता है। कुछ प्रोटीन में इन तत्वों के अतिरिक्त आंशिक रूप से गंधक, जस्ता, ताँबा तथा फास्फोरस भी उपस्थित होता है। ये जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) के मुख्य अवयव हैं एवं शारीरिक वृद्धि तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।

प्रोटीन के शाकाहारी मुख्य स्त्रोतों में चना, मटर, मूंग दाल, मसूर दाल, उड़द दाल, सोयाबीन, राजमा, लोभिया, गेहूँ, मक्का, अरहर दाल, काजू, बादाम,कद्दू के बीज, सीसम, दूध में सबसे अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। प्रोटीन के मांसाहारी मुख्य स्त्रोतों में  मांस, मछली, अंडा  में सबसे अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।

पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में सोयाबीन इसमें 40 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन होता है। 16 से 18 वर्ष के आयु वर्ग वाले लड़के, जिनका वजन 57 किलोग्राम है, उनके लिए प्रतिदिन 78 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

सोयाबीन में 43.2 प्रोटीन होता है,  बंगाल चना, काला चना, हरा चना, मसूर, और लाल चना  में 22 प्रोटीन होता है,  मूंगफली, काजू, बदाम में 23 प्रोटीन होता है,  मछली में 20, मांस में 22, गाय के दूध में 3.2, अंडा में 13.3 (प्रति अंडा),  भैंस के दूध में 4.3 प्रोटीन होता है।

प्रचुर मात्ररर प्रोटीन आपके शरीर की कार्यप्रणाली को दुरूस्त रखता है, भूख को नियंत्रित रखता है, तनाव को कम करता है,  मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, ऊतकों की मरम्मत होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है,  बालों और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है। और अगर प्रोटीन की कमी होने से किडनी से संबंधित रोग होने शुरू हो जाएंगे,  मूत्र संबंधी रोग, किडनी में पथरी का खतरा रहता है।

अत्यधिक प्रोटीन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर हो सकता है। प्रोटीन की मात्रा बढ़ने से कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम हो जाता है जिससे शरीर को फाइबर कम मिलता है।