विश्व पर्यावरण दिवस पर वैश्विक प्रकृति महोत्सव का दिल्ली में आयोजन

विश्व पर्यावरण दिवस पर विश्व मित्र परिवार द्वारा आयोजित किये गये वैश्विक प्रकृति महोत्सव का सांसद श्री रमेश बिधूड़ी ने दीप प्रज्जवलित करके उद्घाटन किया। कार्यक्रम में वैदिक नाद संस्कृत बैंड ने अभिनन्दन के लिए बुलाई गई महिला पार्षदों के साथ-साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद श्री रमेश बिधूड़ी को भी झूमने पर विवश कर दिया। वैदिक नाद नाम के संस्कृत बैंड के संचालक कमल शर्मा ने बताया कि उनका यह प्रयास विश्व में पहला संस्कृत बैंड है जिसे बनाने में उन्हें पूरे 20 साल लगे। रूद्राष्टक और विनायक स्तोत्र के साथ उन्होंने कई प्रचलित संस्कृत भजन सुनाये। इसे उन्होंने संगीत चिकित्सा कहा। कहना न हो विश्व मित्र परिवार के सहयोगी संगठन विश्व महिला परिवार ने दिल्ली के मावलंकर हाॅल में इस अवसर पर नगर निगम में पहली बार चुन कर आई महिला पार्षदों को शील्ड और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये।
इससे पहले प्रकृति-आरोग्य, संस्कृति, विकास और नारी जैसे गहन मुद्दे पर केन्द्रित एक सेमिनार में वक्ताओं ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि पर्यावरण को बचाने के सारे प्रयास खोखले हो रहे हैं। प्रसिद्ध सर्वोदयी कार्यकत्र्ता एवं पूर्व सेवानिवृत आईएएस कमल टावरी ने कहा कि हमें वृक्षारोपण या प्रकृति की सुरक्षा के प्रयास सरकारी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय असरकारी जिन्हें बिनोबा भावे असरकारक कहते थे करने होंगे। सेमिनार में प्राकृतिक कृषि, शुद्ध जल, शुद्ध वायु एवं प्रकृति को बचाने की भी बात कहीं गई। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उत्पन्न उत्पादों के खतरे बताते हुए एक बार फिर प्राकृतिक जीवन को अपनाने की सलाह के साथ खेती किसानी और धरती की उर्वरक शक्ति को जैविक खादों के प्रयोग से बचाने की वकालत की गई। फरीदाबाद से आये बी.के.आर समूह के अध्यक्ष ने कहा कि हमें गैर विपणित वस्तुओं का विपणन करना सीखना होगा और भूमंडलीकरण के विरूद्ध स्थानीयता को खड़ा करना होगा। प्राकृतिक खेती किसानी से उत्पन्न उत्पादों को वैश्विकृत व्यवस्था में जीतना सीखना होगा।
इस बार 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश भर के प्रकृति प्रेमी विश्व मित्र परिवार की इकाई विश्व महिला परिवार के बैनर तले दिल्ली के मावलंकर सभागार में जुटे। प्रकृति, पर्यावरण और संस्कृति, संस्कार से गहरे सरोकार रखने वाले सनातन और सर्वोंदई मूल्यों से जुड़े देश भर के तमाम समाजसेवी एक संगोष्ठी में इस बात पर गहराई से विमर्श किया कि आखिर देश भर में पर्यावरण चेतना के जागरण के बावजूद हरियाली और प्रकृति संरक्षण को लेकर क्या माहौल बना है? जिस तरह से हिमालय के गेलशियर पिघल रहे हैं, दिनोंदिन धरती का तापमान बढ रहा है देश को पर्यावरणीय पुर्नजागरण की आवश्यकता तो नही है? जिस तरह से पिछले एक दशक से पेड़ लगाना एक फैशन बना है उससे देश की हरित चादर कितनी फैली है। इस विषय को लेकर दिल्ली और देश भर के पर्यावरण प्रेमियों ने गहन चिंतन मनन किया। वक्ताओं ने निष्कर्ष के तौर पर पाया कि अब पर्यावरण और पेड़ लगाने को धंधा बनाया जाना चाहिए। सरकारी मदद के बजाय लोग अपने पैंसे से पेड़ लगायें और पेड़ लगाने के लिए लोगों को पैंसा दें।
5 जून को विश्व प्रकृति महोत्सव के नाम से लगे इस एक दिवसीय मजमे में देश भर के पर्यावरण और प्रकृति प्रेमियों ने प्रकृति-आरोग्य, विकास और नारी जैसे गहन मुद्दों पर वैचारिक विमर्श किया। विश्व पर्यावरण दिवस पर इस तरह का मानवीय जमावड़ा लगाने वाले विश्व मित्र परिवार के अध्यक्ष भू त्यागी भारतीय ने इस अवसर पर विश्व मित्र परिवार के देश भर में 11 करोड़ पेड़ लगाने के संकल्प को दोहराते हुए इसके कार्यान्वयन की रणनीति पर जन समर्थन हासिल करने की कोशिश की। ताकि इस हेतु कश्मीर से कन्याकुमारी तक निकाली जाने वाली सम्पूर्ण पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम संसद महायात्रा के लिए संसाधन जुटाये जा सकें। हरिद्वार से आये स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश जी ने कहा कि इस पर्यावरण यात्रा में हम भरपूर सहयोग करेंगे।
विश्व मित्र परिवार की महासचिव भावना त्यागी भारतीय ने बताया कि विश्व मित्र परिवार अभी तक पर्यावरण प्रकृति और नारी जैसे विषय को लेकर अब तक 99 सेमिनार आयोजित कर चुका है। इन आयोजनों में प्रकृति, पर्यावरण और नारी के सम्मान को लेकर काम कर रही 400 से भी अधिक हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है। उनके अनुसार इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस आयोजित विश्व मित्र परिवार का यह 100वां सेमिनार है। इस अवसर पर विश्व मित्र परिवार का सहयोगी संगठन जो महिलाओं के सम्मान और मुद्दों को लेकर काम कर रहा है संस्था ने दिल्ली नगर निगम में भारी संख्या में चुनी गई महिला पार्षदों को सम्मानित किया।