भारत को हार्ट अटैक से मुक्त करने का पहला प्रयास

देश में हर 10 सेंकड में हार्ट अटैक से एक मौत
नई दिल्ली 28 सितम्बर 2016: साइंस एंड आर्ट आॅफ लिविंग (साओल) ने भारत में दिल की बीमारियों से बचाव तथा उनके निवारण के लिए एक राष्ट्रीय पहल शुरू की है। इमामी फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित नेशनल प्रोग्राम फाॅर प्रीवेंशन एंड इरैडिकेशन आॅफ हार्ट अटैक (नेफा), भारत का पहला अभियान हंै, जो सीवीडी (काॅर्डियों वास्योकुलर डिसीजीज) पर जागरूक करने का काम करता है। इसके तीनों चरणों में देशभर के 6 करोड़ से भी अधिक लोगों को जागरूक किया जाएगा।
dr-bimal-chhajer-saaol-heart-centreइस अभियान के शुभारंभ की घोषणा करने के लिए साओल द्वारा नेशनल म्यूजियम, आॅडिटोरियम, जनपथ, नई दिल्ली में प्रेस काॅफ्रेंस का आयोजन किया गया है। साओल हार्ट सेंटर के निदेशक डा. बिमल छाजेड़ ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि ‘देश में प्रत्येक दिन 9,000 लोगों की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हो जाती है-इसका मतलब है हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत। मरने वाले उन 9,000 लोगों में 40 वर्ष से कम उम्र के युवा शामिल हैं। भारत में दिल की बीमारियों की इस महामारी को रोकने का केवल एक ही रास्ता है, अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाये।’
नेफा का मुख्य लक्ष्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी देना और दिल की बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। इसके पहले चरण के अंतगर्त आंकड़े एकत्रित करके और पूरे देश में मुफ्त बायो-मेडिकल जांच की जायेगी है, जिससे कि हृदय स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में पता लगाया जा सके। इसके पहले चरण कि शुरूआत 29 सितंबर, 2016 (वल्र्ड हार्ट डे) से हो रही है, इसके अंतर्गत महानगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु) के 6000 लोगों को शामिल किया जा रहा है।
इसमें हिस्सा लेने वाले लोग बायो-केमिकल जांचों जैसे लिपिड प्रोफाइल और ग्लूकोज जांच के लिए कैंप वाले दिन के लिए खुद का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। अगली जांच होने तक प्रतिभागियों के लिए जलपान की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद दिल को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एक शिक्षाप्रद ‘एचआरआईडीएवाई-ईडीयू वैक्सीन’ वीडियो दिखाया जाएगा, इसके बाद बायो-मेडिकल परिणामों के आधार पर काउंसलिंग की जाएगी।
डाॅ. छाजेड़ ने कहा कि, ‘भारत के कार्डिएक अस्पताल 2 लाख से अधिक ओपन हार्ट सर्जरी करते हैं और हर साल इसमें 25 प्रतिशत का इजाफा हो रहा है, लेकिन वे हार्ट अटैक के मामलों में कमी लाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। ये सर्जरी केवल तकलीफ में आराम पहुंचने का काम कर रही है। हार्ट अटैक से जुड़ी अहम जानकारियां और उससे जुड़े खतरों के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है, ताकि होने वाली मौतों को रोका जा सके।
साओल सेफ्टी व्हील्सः साओल ने ‘सरस’ नाम से एप्स लांच किया है वास्तव में सरस दिल की बीमारी के कारणों को समझने का एक सरल डिजिटल माध्यम है, जोकि कुछ सवाल पूछता है, हृदय स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करता है और हार्ट अटैक को रोकने के लिए जीवनशैली से संबंधित कई सुझाव देता है।
डा. छाजेड़ ने कहा कि ‘यह कार्यक्रम हृदय रोगों और उससे जुड़े नुकसानों के प्रमुख कारणों (डायबिटीज, बीपी, मोटापा) को खत्म करने के लिए अधिक से अधिक लोगों के बीच जागरूकता फैलाने तथा उन्हें शिक्षित करने पर जोर देगा।’ जानकारी के अभाव के कारण हार्ट अटैक की स्थिति पैदा होती है और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से यह स्थिति बदली जा सकती है। शरीर पर ब्लाॅकेज या अवरोध का पता 80 प्रतिशत ब्लाॅकेज होने पर ही चल पाता है और इसके बाद डाॅक्टर ब्लाॅकेज हटाने के लिए सर्जरी या एंजियोप्लास्टी करवाने की सलाह देते हैं। यदि हमें हृदय स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में पता पहले चल जाए तो हम ब्लाॅकेज और उससे होने वाली परेशानियों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं। हमारा सिद्धांत एकदम स्पष्ट है, यदि पोलियो को जड़ से खत्म किया जा सकता है, तो फिर हार्ट अटैक को क्यों नहीं। इसके लिए जरूरत है कि हम सब हृदय स्वास्थ्य पर प्रारंभिक मेडिकल चेकअप के जरिए लोगों को हृदय स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दें।’