जबरन भूमि अधिग्रहण, कॉर्पोरेट लूट और फासीवाद के खिलाफ जंग

अहमदाबाद, 18 जुलाई 2016ः देश के 15 राज्यों से आए 500 से भी ज्यादा जनसंघर्षों के प्रतिनिधियों ने सम्मिलित स्वर में  जल-जंगल-जमीन और जनतंत्र की लूट के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है।

war-against-property-lootगुजरात विद्यापीठ में भूमि अधिकार आंदोलन के नेतृत्व में चल रहे तीन दिवसीय जनसंघर्षों का राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा (कैनिंग लेन) से हनन मुल्ला ने कहा कि भूमि अधिकार आंदोलन न सिर्फ जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा बल्कि वह सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई को भी आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि जल-जंगल-जमीन और जनतंत्र के खिलाफ लड़ाई केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर तेज की जाएगी। राज्यों में भूमि अधिकार आंदोलन के नेतृत्व में विभिन्न जनसंघर्षों के साथ समन्वय स्थापित करने की कोशिश करेगा और इस समन्वय के दौरान तीन दिवसीय सम्मेलन में हुई चर्चाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों के बीच लेकर जाएंगे।

अखिल भारतीय वन श्रमजीवी यूनियन से रोमा मलिक ने कहा कि आज जनांदोलनों के साथियों के सामने परिस्थितियां संकटपूर्ण है। शासक वर्ग किसी भी तरह के विरोध के स्वर को बर्दाश्त नहीं कर रहा है। ऐसे में जरूरत है कि एक क्षेत्र में अलग-अलग मुद्दों पर लड़ रहे जनसंघर्ष आपस में एकता तथा समन्वय स्थापित करें तभी वह शासक वर्ग की दमनकारी नीतियों का मुकाबला कर पाएंगे।

रोमा ने कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ मुद्दों की नहीं है बल्कि वर्गीय लड़ाई है और हमें इस लड़ाई को आगे इंकलाब तक लेकर जाना है।

सर्वहारा जनांदोलन, महाराष्ट्र से उल्का महाजन ने तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन करते हुए कहा कि जिस तरह से पूंजीपति वर्ग जबरन किसानों की जमीनें अधिग्रहित कर रहे हैं और उसे विकास का नाम देते हैं उसी प्रकार जनता को एकजुट होकर इन पूंजीपतियों के विशालकाय भवनों पर कब्जा करके वहां खेती करनी होगी। और वही देश का असल विकास होगा। उल्का ने इस लड़ाई में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां एक तरफ पुरूष साथी मुआवजे पर आकर समझौता करने के लिए तैयार हो जाते हैं वहीं महिलाएँ लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ने का जज्बा रखती हैं। उन्होंने कहा कि बिना महिलाओं की अगुवाई के हम इस लड़ाई को मुक्कमल अंजाम तक नहीं पहुंचा पाएंगे।

जल-जंगल-जमीन और जनतंत्र की लूट के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प

जनसंघर्षों की भविष्य की रणनीति पर सम्मेलन में एक 20 सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें भूमि सुधार, बीजों पर किसानों का हक, जल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय का हक, स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की विकास नियोजन में भूमिका, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि के निजिकरण पर रोक, सांप्रदायिक तथा फासीवादी राजनीति का प्रतिरोध, दलित तथा आदिवासियों पर के साथ अन्याय का खात्मा, आंदोलनकारियों पर लगाए गए फर्जी केसों को वापस लेने, एएफएसपीए को रद्द करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्यीकरण खत्म कर शांति बहाल करने जैसे अन्य मुद्दों पर प्रस्ताव रखा गया। इन प्रस्तावों को सम्मेलन ने सर्वसम्मति से पारित किया।

भूमि अधिकार आंदोलन द्वारा केंद्र और राज्यों में लड़ाई को तेज करने के लिए आगामी छह महीने के लिए तीन कार्यक्रमों की घोषणा की गई जो निम्न हैं-

10 अगस्त 2016 को देश में हो रहे जबरन भूमि अधिग्रहण और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के उल्लंघन के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

2 सितंबर 2016 को देश भर के ट्रेड यूनियनों तथा मजदूर संगठनों द्वारा आहूत देश व्यापी हड़ताल का भूमि अधिकार आंदोलन समर्थन करेगा और अपने-अपने क्षेत्र में मजदूरों के साथ मिलकर हड़ताल को सफल बनाने में सहयोग देगा।

नर्मदा जल-जमीन हक्क सत्याग्रह के तहत 29-30 जुलाई 2016 को बड़वानी, मध्य प्रदेश में एक विशाल जन प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।

दिल्ली चलो नारे के साथ देश भर में एक साथ चार स्थानों से यात्राओं की शुरुआत होगी जो 24 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों के एक विशाल जनप्रदर्शन के रूप में समाप्त होगी।