पति-पत्नी और वे

-सुभाष चंदर

समय-रात्रि के बारह बजकर बीस मिनट। स्थान-किसी छोटे शहर के सिनेमाघर से तीन फर्लांग की दूरी पर एक सुनसान सड़क। सड़क पर दो पैदल यात्रियों के चलने की आवाज़ आ रही है। जो कपड़ों से एक पुरुष और महिला का आभास दे रहे हैं। दोनों रात्रि का आखिरी शो देखकर लौट रहे हैं। दोनों के बीच फिल्म का चर्चा हो रही है। फिल्म की चर्चा से थोड़ी फुरसत मिलती है तो दोनों लड़ने का शगुन भी कर लेते हैं। इससे यह लगता है कि हो न हो दोनों पति-पत्नी हैं। पति कुछ कहता है तो पत्नी अपने पत्नीत्व की गरिमा की रक्षा करते हुए जुबान की छुरी से बात काट देती है। इसी नोक झोंक में आधा सफर पूरा हो जाता है। थोड़ी देर की मान-मनौबल के बाद पति समझौते की पेशमश के रूप में जेब से मूंगफली का लिफाफा निकालकर देता है। पत्नी की मुख मुद्रा परिवर्तित होती है। नेपथ्य में मूंगफलियों के कत्ल की आवाज़ें सुनाई देती है। टूंग-टूंगा-किचक किच। मूंगफलियों के टूंगने के बाद पति-पत्नी थोड़ी देर शांत होकर अगली कार्रवाई के बारे में सोचते हैं।

बस यहां से कहानी थोड़ा मोड़ लेती है। कहानी में एकाएक दो किरायेदारों का आगमन होता है। वातावरण में भारी-भरकम बूटों की आवाज़ आती है। फिर बूट नमूदार होते हैं। बूटों के ऊपर खाकी वर्दियों और खाकी वर्दी के ऊपर दो तनी हुई दो अदद मूंछें। बूटों की खट-खट के बाद वातावरण में-”क्यों बे स्साले। कहां से आ रहा है।” के बाद कुछ कड़क किस्म की आवाज़े आती है जिन्हें आम जुबान में शायद गाली का दर्जा दिया जाता है। गालियों की आवाज़ सुनते ही उस अंधेरे में भी पति को मालूम पड़ जाता है कि सौ प्रतिशत खालिस पुलिस वालों से मुठभेड़ होने वाली है। वरना गालियों का इतना सही उच्चारण किस मरदुए के बस का है। यह दिव्य ज्ञान प्राप्त होते ही उसमें बकरे की आत्मा प्रवेश कर जाती है। इसके सबूत के रूप में वह मिमियाने का अभ्यास करने लगता है।

अब दोनों पुलिस वाले और उनकी कड़क आवाज़ एकदम उनके पास से नमूदार होती है। अब चूंकि पुलिसियों में गाली से लेकर मूंछें तक सब एक जैसा लगता है। इसलिए हम पाठकों की सुविधा के लिए उन्हें पुलिस नं. 1 और पुलिस नं. 2 कहकर पुकारेंगे।

पुलिस नं. 1 उवाच….. क्यों बे हरामजादे! सुना नहीं? हमने आवाज़ दी थी। बोल कहां से आ रहा है? (और थोड़ा पास आकर औरत की ढोढ़ी पर हाथ लगाकर) और इस छम्मक छल्लों को कहां से पकड़ लाया? कौन है ये? जल्दी बता। वरना अन्दर कर दूंगा।

घवराये पति का मिमियाहट भरा उवाच…. स्साब-’ये मेरी पत्नी है।’

पुलिस नं. 2- उवाच-स्साले झूठ बोलता है। पत्नी है। हमें बहकाता है। पुलिस से बदमाशी दिखाता है। (बदमाशी दिखाने के एवज में पति के शरीर में पिछले हिस्से में डण्डा लगने की आवाज़ आती है।)

पति प्रतिवाद करता है। मिमियाता है। ‘प्रत्येक क्रिया की बराबर प्रतिक्रिया होती है’ के सिद्धान्त के फलस्वरूप डण्डे की पावती के रूप में चीख भी निकालता है – स्साब मैं झूठ नहीं बोल रहा बिलकुल सच कह रहा हूं। यह मेरी पत्नी है। अभी दो साल पहले शादी हुई है।

पुलिस नं. 2 महिला के शरीर को एक दो बार छूकर उसके झूठ का शारीरिक परीक्षण करता है। महिला हाथ हटाने की कोशिश करती है। इस पर पुलिस जी नम्बर एक उसे और जोर से पकड़ लेता है। पति फिर प्रतिवाद करता है। पुलिस वाले के हाथ पकड़ने की कोशिश करता है। इसके एवज में फिर उसे डण्डा पड़ता है। डण्डे की आवाज़ इस बार सिर से आती है। आवाज़ के पीछे उसकी चीख भी आ जाती है।

अब काफी देर से चुपचाप खड़ा पुलिस नं. 2 अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है।

पुलिस नं. 2- – तू रहने दे रामचंदर। मैं देखता हूं। (फिर महिला की ओर उन्मुख होकर) क्यूं री छिनाल-सच बता कहां से भागकर आई है? आवाज के साथ ही हाथ आगे बढ़ाता है। महिला उसी अनुपात में पीछे खिसकती है। मगर कानून के हाथ बढ़ते चले जाते हैं।

कानून के हाथ वाकई काफी लंबे होते हैं। इतने लंबे तो वाकई जिनमें मर्द की टोपी और औरत की चुटिया आ जाए। सो औरत की चोटी उसके हाथ में आ जाती है। औरत में भी अब बकरी की आत्मा प्रवेश कर जाती है। सो वह भी मिमियाती है।

“पुलिस जी! हम सच्ची कह रहे हैं। हम पति-पत्नी है। हम कहीं से नहीं भागे। हमें छोड़ दो।” कहकर रोने लगती है (रोने से लगता है कि वह औरत ही है बकरी होती तो कभी ना रोती, चुपचाप थाने जाकर कट जाती।)

पुलिस नं. 1-अच्छा! तो तुम शादी शुदा हो। बताओ क्या सबूत है? तुम्हारी शादी का?

पति (मिमियाने से फुर्सत पाते ही)-हुजूर! हमें क्या पता था कि शादी का भी सबूत मांगा जाएगा। वरना हम जरूर जेब में रखकर चलते। वैसे देख लीजिए, इसकी मांग में सिन्दूर है। गले में मंगलसूत्र है। पैर में बिछुए हैं। सच्ची पुलिस साब! मैं इसे कहीं से भगाकर नहीं लाया। थोड़ी दूर पर हमारा घर है। वहां चलकर देख लीजिए।

पुलिस नं. 1 में भेड़िया प्रवेश करता है- “चोप साले। पुलिस से जबान लड़ाता है। साले कहता है कि मांग में सन्दूर हैं, मंगलसूत्र है। अबे… सिन्दूर तो पतुरिया भी भरती है।”

आदमी अबकी बार गुस्से में आता है-साब ये हमारी घरवाली है और आप इसे बार-बार पतुरिया कह रहे हैं। छोड़िये उसे।

पुलिस नं. एक और दो समवेत स्वतर में हंसते हैं। साथ ही साथ उवाचते हैं- स्साले पतुरिया बनाने में क्या जाता है। आज रात ही थाने ले जाकर चेक किए लेते हैं कि वह तेरी पत्नी है या पतुरिया। थाने में काफी एक्सपर्ट हैं। तेरी पत्नी हुई तो ठीक। वरना सुबह तक वापस कर देंगे।

(नेपथ्य में भेड़िये की हंसी सुनाई देती है।) पुलिस नं. 2-हां… हां… चलो। थाने ही चले। वहीं तुम दोनों को चैक करेंगे। तुम्हारी बोलती बंद करेंगे। यह सुनते ही आदमी और औरत दोनों चिल्लाने लगते हैं। जैसे उनमें मौजूद बकरे और बकरी को कसाई की छुरी दिख गई हो-नहीं माई-बाप नहीं हम थाने नहीं जाएंगे। चाहे कुछ भी हो।

पुलिस नं. 1 और 2 हंसते हैं-ठीक है नहीं ले जायेंगे तो… फिर सबूत दो- पति-पत्नी होने का।

पति के सिर में हवा के साथ बुद्धि का प्रवेश होता है। सो वह जेब की नकदी का सबूत उनके हवाले कर देता है। मगर कानून खुश नहीं है। उसे औरत से भी पतुरिया न होने का सबूत चाहिए।

पत्नी अपने जेवर उतार देती है। पर मंगलसूत्र बचा लेती है। मगर कानून को पूरे सबूत चाहिए होते हैं। सो कानून उसका मंगलसूत्र भी उतार लेता है। पुलिस नं. 1 नोटों के सबूत गिनता है। पुलिस नं. 2 जेवरों के सबूतों को जेब के अमानती सामानघर में जमा करता है।

कानून को पूरे सबूत मिल जाते हैं। सो अब कानून का चेहरा खिल जाता हैं पुलिस नं. एक और दो दोनों को पति-पत्नी होने का सर्टिफिकेट दे देते हैं। साथ ही वह यह हिदायत भी कि “अगर पति-पत्नी हो तो रात का शो मत देखा करो। घर में रहा करो। जानते नहीं हो कितनी गुण्डागर्दी बढ़ गई है। राह चलते ही लोग लूट लेते हैं।” समझ गए ना। तुम्हारा भाग्य अच्छा था कि तुम्हें हम मिल गए। वरना अगर गुण्डे बदमाश मिल जाते तो जाने क्या होता।

अब दोनों पति-पत्नी यह सोचते हुए वापस आ रहे हैं। सच अगर ये दोनों पुलिसवाले न मिलकर कहीं गुण्डे बदमाश मिल गए होते तो जाने क्या होता।

सड़कें वैसी ही सुनसान हैं। पुलिस-दम्पति वार्तालाप के बीच सड़कों, पास के मकानों की खुली खिड़कियां बंद हो गई हैं। खेल खत्म होने पर देश के शरीफ और इज्जतदार नागरिक सोने चले गए हैं।

पति और पत्नी दोनों सड़क पर जा रहे हैं। वे दोनों बाते नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि लड़ भी नहीं रहे हैं। अब तो लगता ही नहीं है कि वे पति-पत्नी हैं भी या नहीं। कहीं पुलिस वाले सच तो नहीं कह रहे थे?