मीडिया में नैतिक मूल्यों का विकास जरूरी: . कुरैशी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाई. कुरेशी ने कहा कि स्थायी विकास और मूल्याधारित समाज निर्माण में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही राष्ट्र के अनवरत एवं स्थायी विकास को संभव कर सकता है। व्यक्ति के जीवन में जिस तरह मूल्य एवं आदर्श की स्थापना जरूरी है, उसी तरह मीडिया जगत में भी नैतिकता का विकास आवश्यक है।

डॉ. कुरैशी ने आज आचार्य महाश्रमण के विद्वान शिष्य शासनश्री मुनिश्री सुखलालजी के सान्निध्य में पीएचडी चैम्बर में आयोजित तृतीय आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ स्मृति व्याख्यान माला को सम्बोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त विचार व्यक्त किए। ‘स्थायी एवं नैतिक विकास में मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी’ विषय पर आयोजित इस व्याख्यानमाला में राजधानी के प्रमुख व्यवसायियों, उद्योगपतियों, शिक्षाशास्त्रिायों, पत्राकारों, साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं कॉरपोरेट जगत के प्रमुख व्यक्तित्वों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। जैन श्‍वेताम्बर तेरापंथी सभा एवं पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. अभिशेक मनु सिंघवी एवं सम्मानित अतिथि हिन्दुस्तान टाइम्स के सलाहकार श्री वीर सिंघवी थे। समारोह में जैन विष्वभारती विष्वविद्यालय की कुलपति समणी चारित्राप्रज्ञा, पदमश्री डॉ. के. के. अग्रवाल, अमर उजाला के स्थानीय संपादक श्री संजय देव, न्यूज नेषन चैनल के सीनियर न्यूज एडिटर श्री अजय कुमार, डीसीएम हुंडई लि॰ के चेयरमैन श्री आलोक बी. श्रीराम, पीएचडी चेम्बर के सदस्य श्री एम. के. दुगड़, पीएचडी चेम्बर के शिक्षा समिति के सचिव श्री जतिन्द्र सिंह आदि ने आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य श्री महाप्रज्ञ के अवदानों को उपयोगी बताते हुए समाज एवं राष्‍ट्र निर्माण में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया एवं मीडिया में नैतिक मूल्यों की आवश्‍यकता व्यक्त की।

मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा आचार्य श्री महाप्रज्ञ एक अद्भूत आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे, उन्होंने समूचे विष्व के कल्याण के लिए चिंतन-मनन के साथ-साथ समाज और राश्ट्र के निर्माण में स्वस्थ और नैतिक मूल्यों की प्रभावी विवेचना की। आज के मीडिया और राजनीति से जुड़े लोग भी उनके बताये मार्ग पर चलकर स्वस्थ समाज की स्थापना कर सकते हैं। शासन श्री मुनि सुखलालजी ने कहा कि वर्तमान की समस्याओं का समाधान अध्यात्म एवं नैतिकता के द्वारा ही संभव है। मूल्यों एवं नैतिकता के अभाव में सभी व्यवस्थाओं पर प्रश्‍नचिन्‍ह लग रहा है और अकल्पित समस्याएं पैदा हो रही हैं। मुनि सुखलाल ने आगे कहा कि सार्थक और स्थायी विकास के लिए हमें आचार्य श्री तुलसी के अणुव्रत आंदोलन को समझना होगा। उन्होंने कहा कि जनरुचि एवं उनमें नैतिकता की अलख जगाने के लिए मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। सत्य की प्रस्तुति के साथ-साथ जनरुचि के परिष्‍कार का महत्वपूर्ण दायित्व भी मीडिया पर है।

श्री अजय कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि अक्सर मीडिया पर यह आरोप लगाया जाता है कि आर्थिक प्रलोभन में वह नैतिक, सामाजिक और राष्‍ट्रीय मूल्यों को धुंधलाता है। जबकि मीडिया अक्सर जनता की रुचि और आकर्षण के हिसाब से अपने कार्यक्रमों को प्रस्तुति देता है। जरूरत है जनरुचि मूल्यों और संवेदनाओं से जुड़े। उन्होंने पेड न्यूज की चर्चा करते हुए कहा कि आजादी के दौरान भी पेड न्यूज का प्रचलन था। इसी संदर्भ में उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा करते हुए प्रष्न किया कि क्या स्टिंग ऑपरेशन अनुचित है? अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया की भूमिका कहीं न कहीं जनमुद्दों के पक्ष में खड़े होने की रही है, अन्यथा उसकी विष्वसनीयता नहीं रहेगी। अमर उजाला के संपादक श्री संजय देव ने कहा कि पर्यावरण और जनकल्याण की नज़र से भी मीडिया का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है।

मुनि मोहजीतकुमार ने कहा कि मीडिया की प्रभावी भूमिका के लिए तीन सुंदर षब्द हैं- नीति, नियम एवं निष्‍ठा। अगर मीडिया की भूमिका में इन तीनों शब्दों का समावेष किया जाता है तो समाज और राष्‍ट्र के विकास को स्थायी और सार्थक दिशा दी जा सकती है।

इस अवसर पर पीएचडी चेम्बर के उपाध्यक्ष श्री सौरभ सानियाल ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि चेम्बर के लिए आज की यह संगोष्‍ठी इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें दो आध्यात्मिक संतपुरुषों की स्मृति के साथ समाज की विभिन्न धाराओं का समन्वय हो रहा है। प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल की सदस्याओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन श्रीमती सुनीता जैन ने किया। आभार ज्ञापन जैन ष्वेताम्बर तेरापंथी सभा के महामंत्री श्री सुखराज सेठिया ने किया।

श्री मांगीलाल सेठिया, श्री एम. के. दुगड़, श्री जतिन्द्र सिंह आदि ने प्रशस्ति पत्र, साहित्य एवं शील्ड के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया।

प्रेशकः ललित गर्ग