बेगुनाहों के खून का बदला अब कैसे अदा हो?

इस जहां में अब दिल लगता नहीं है, किसी पर भरोसा होता नहीं है।
यहां चोरों ओर लुटेरों का राज है, हर जगह माल के पेटू बैठे हैं।
जीहजूरी और चमचों से क्‍या देश चलेगा, सब बस खुदा भरोसे है।
कातिल यहां भी हैं वहां भी, चुनकर गद्दी पर हमीं ने बिठाया है।

नई दिल्ली: सीबीआई की चार्जशीट के बाद इशरत बेगुनाह साबित हुई अब बेगुनाह को मारने की सज़ा किसको मिले। क्‍या बेसहारा, गरीब, कमजोर, पिछड़ों की जान इतनी सस्‍ती है? क्‍या मौत इतनी सस्‍ती है? क्‍या ये मारने वाले दरिन्‍दें बेऔलाद होते हैं? कसाई, या जल्‍लाद होते हैं? खबर है कि एक पुलिस अफसर ने मौलाना खालिद के मुंह पर पेशाब की, यह सब क्‍या है? क्‍या इन्‍हें आप सभ्‍य कहेंगे?

मजलूमों के खून के आसूंओं, शैलाब बन जाओ फिर एक बार,
बद्दुआ भी कम है अगर कलेजा होता, काश मैं कोई फरिश्‍ता होता।
जालिमों को दिखा दो मासूमों की आहें, किस कदर कयामत ढाती है,
औंधे लिटाकर झाग की तरह, कचरे के ढ़ेर को समुन्‍दर में फैंक आता।।

मेरे प्‍यारे दोस्‍तों, मुझे माफ करना, यह ना शायरी है, बस यह एक इंसान की दर्द भरी फरियाद है कि बस अब काफी हो चुका, सभी इंसा‍न प्रेमियों को एक जुट होकर जाति, धर्म, ऊँच-नीच, गरीब-अमीरी का भेद छोड़कर जेलों में बंद बेगुनाहों की रिहाई के लिए सरकार से बातचीत करनी चाहिए। सवाल धन, नाम या ओहदा पाने का नहीं, वह कहां हैं जिनके पास धन भी था, नाम भी था और मुल्‍क के बादशाह थे। कृपया दुनिया का लोभ त्‍यागकर बस इंसान की सेवा को परम धर्म बनाएं, इसी में पूरी दुनिया की भलाई है। मेरी अपील है कि सभी सामाजिक संस्‍थाएं, व्‍यक्ति विशेष, मीडिया, नेतागण जो ईमानदारी से इंसाफ के लिए आगे आना चाहते हैं वे कृपया अपना समर्थन दें और एक दूसरे को सहयोग करें।

इशरत जहां एनकाउंटर केस में सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। सभी अपनी-अपनी टर-टर करने लगे। आप भी कुछ टर-टर पर एक नजर दौड़ाएं:-

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे- तथ्य हैं, इस फर्जी एनकाउंटर के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष- सीबीआई ने इशरत मामले में चार्जशीट दाखिल किया है। मैं कांग्रेस पार्टी से कहना चाहता हूं कि राजनीतिक फायदे के लिए सीबीआई और आईबी को आमने-सामने खड़े कर रही है। देश में कई एनकाउंटर हुए हैं लेकिन सरकार इसको अपने राजनीतिक फायदे के लिए हाइप दे रही है। मैं सरकार से कहना चाहूंगा कि इशरत जहां की पृष्ठभूमि की जांच करे और आतंकियों से उसके लिंक को सामने लाए।

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी – 2002 का नरसंहार उसके बाद फर्जी मुठभेड़। गुजरात में जो प्रशासन था वो बिलकुल ही बेलगाम था। बर्बरता पूर्ण काम अगर सरकार करती है तो इसका फायदा किसको होना था। इस बात का पता लगाना ज़रूरी है। आतंकवाद और काल्पनिक खतरों की दुहाई देकर बीजेपी अपना दामन बचा नहीं पाएगी। एक बात साबित हो गई है कि दाढ़ी में तिनका है।

लक्ष्मीकांत यादव- जब शिवराज पाटिल गृह मंत्री थे, उन्होंने एफिडेविट दिया था जिसमे इशरत जहां को आतंकवादी बताया गया। यूपीए को 9 साल हो गए। इतने साल तक इस मामले को क्यों निलंबित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबाआई को सरकार का तोता बताया था। इस को एक बार फिर से यूपीए ने साबित कर दिया है।

शरद यादव, जेडीयू- एजेंसी को बिना किसी भय के जांच करनी चाहिए। इस फर्जी एनकाउंटर के पीछे कौन थे। इसकी खोज होना भी जरूरी है।

रीता बहुगुणा, कांग्रेस- गुजरात में जो हो रहा है, उसे देखकर भारत के सभी समझदार लोग चिंतित है। पुलिस के अधिकारी लोगों की हत्या करते जा रहे हैं। गृह मंत्री और सीएम की मंज़ूरी थी। कानूनी प्रक्रिया का कोई महत्त्व नहीं रहा मोदी सरकार के दौरान। अपराधियों को भी राज्य ने बचाया। जिन नेताओं पर प्रश्न चिन्ह है आज वो श्रेष्ट पद संभाल रहे हैं।

साबिर अली, जेडीयू- इस देश के कानून का कत्ल किया गया। देश के मासूम नागरिकों के साथ नाइंसाफी की गई। यह एक मुद्दा है और इस पर चर्चा होनी चाहिए। इससे बड़ा जुल्म नहीं है। इतने बड़े अफसरों के ऊपर भी लोग थे जो उन्हें इंस्ट्रक्शन दे रहे थे।

हरीश रावत, केंद्रीय मंत्री- इतने सुनियोजित तरीके से किया गया एनकाउंटर बिना किसी बैकअप के नहीं हो सकता है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते हैं।

सत्यव्रत चतुर्वेदी, कांग्रेस- सीबीआई ने कोर्ट के निर्देशन में यह जांच की है। निष्पक्ष रूप से जांच हो। मोदी और उनके मंत्रिमंडल की जानकारी के बिना इतने बड़े पुलिस अफसर ऐसा कुछ नहीं कर सकते थे। अदालत इस पर अंतिम रूप से फैसला करेगी।

हमारे कहने को कुछ बचा नहीं है मगर इतना जरूर कहेंगे कि बेकसूरों का खून जाया नहीं जाऐगा, एक तूफान जरूर आऐगा जो सबको गर्क करेगा, तब न कोई आह भरेगा, न आंसूओं को पौंछने वाला होगा और न रोने वाला इसलिए अभी भी बाज आ जाओ ये दुनिया के जालिमों क्‍योंकि जुल्‍म का अंत यकीनी और जरूरी है। तथास्‍तु, आमीन।

-सम्‍पादक: मोहम्‍मद इस्‍माईल