असंभव तो कुछ नहीं, प्रयास करके तो देखें

लेखक: सक्सेस गुरु ए.के. मिश्रा

समय किसी के पास नहीं होता, निकालना पड़ता हैः आखिर भारत की सबसे बड़ी, सबसे मानी-जानी व रुतबे की नौकरी की चाहत कौन नहीं रखता. जी हां, आपने सही सोचा कि मैं सिविल सर्विसेज की बात कर रहा हूं. हर कोई चाहता है कि वह आईएएस पीसीएस अफसर बन जाए. लेकिन यह इतना आसान नहीं है. सिविल सर्विसेज का नाम आते ही हमारे दिमाग में घंटों बैठकर पढ़ाई करना, किताबों में गड़े रहना, हर क्षेत्र में जागृत रहने की तस्वीर उभर आती है. सबके दिमाग में यही चलता है कि इसकी पढ़ाई करने के लिए तो दिन भर केवल पढ़ाई करेंगे और किताबों को देखते रहेंगे तभी जाकर कोई सफलता प्राप्त कर सकता है. तो, ऐसे में नौकरीशुदा लोग इस परीक्षा में प्रयास देने का ख्याल ही अपने दिमाग से निकाल देते हैं. वे परीक्षा के लिए पढ़ाई का समय नहीं निकाल पाएंगे, ऐसा सोचकर ही कई लोग परीक्षा देने का ख्याल अपने दिमाग में नहीं लाते हैं.
यह मानसिकता व सोच दोनों गलत हैं कि नौकरी के साथ यह परीक्षाएं नहीं दी जा सकतीं या उनकी तैयारी भी नहीं की जा सकती है. यदि कोई सही ढ़ंग से प्लानिंग करे और अपने समय का सदुपयोग करना जिसे बखू बी आता हो, वह यकीनन आई एएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर सकता है. इसके लिए कुछ दिशा निर्देशों का पालन कर आप अपना यह सपना जरूर पूरा कर सकते हैं.

विश्वास रखें कि यह संभव है: जब भी आप पढ़ाई के बारे में सोचते हैं तो आप के दिमाग में घंटों किताबों से चिपके रहने की छवि सामने आती है. अगर आप जबरदस्ती ऐसा करना भी चाहें तो भी आप को निराशा के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगेगा. वैसे भी जब आप नौकरी कर रहे होते हैं तो आप सुबह नौ से रात नौ बजे तक व्यस्त ही होते हैं. ऐसे में सोमवार से शुक्र वार तक तो आप लगातार 4-5 घंटे पढने का सोच भी नहीं सकते हैं. ऐसे में आप निराश न हों और न ही इसके लिए अपराधग्रस्त महसूस करें. अब आप ऐसे में अपने समय के एक-एक सेकंड को भी अच्छी तरह से इस्तेमाल करें. अपनी समय सारिणी को सुधारें. अगर आप रात में दस बजे से सुबह सात बजे तक सोते हैं तो अब रात में 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ही सोएं.

मिनटों में पढ़ाई करें, घटों में नहीं: आप जहां भी हैं, जैसे भी हैं, अपने समय सारिणी में से 15-20 मिनट का समय निकालते रहें व कुछ न कुछ तैयारी करें क्यों कि एक साथ घंटों तो आप पढ़ नहीं सकते. जैसे सुबह ऐप्टिट्यूड थ्योरी के बारे में पढ़ लें और फिर ऑफिस में लंच ब्रेक के बाद 4-5 सवाल हल करें. इसी प्रकार सामान्य ज्ञान के बारे में एक-एक विषय को छोटे-छोटे भागों में बांटें और धीरे-धीरे पढ़ें. ऑफिस में जब भी आप को थोड़ा सा समय मिले तो दुबारा किताब खोलें और पढ़ें. घर लौटने के बाद डिनर के बाद भी आप दो तीन घंटे पढ़ सकते हैं. ऐसे में, जब आप अपने समय का लेखा-जोखा करेंगे तो पाएंगे कि आप दिन में कम से कम 4-5 घंटे का समय निकाल पा रहे हैं.

किसी बस या वाहन में पढ़ाई न करें: कई बार परीक्षा का तनाव लेकर हम लोग चलती बस या वाहनों में भी पढने बैठ जाते हैं जो कि आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक होता है. इससे हमारी आंखों की मांस-पेशियों पर दबाव पड़ता है और आंखें कमजोर होने लगती हैं. फिर ऐसे पढने से रात को आप की आखें जल्दी थका हुआ महसूस करने लगती हैं और देर रात तक पढने में आप को सहयोग नहीं करती हैं. अतरू हमेशा बस आदि में न पढक़र रात को आधा घंटा अधिक पढना समझदारी का विकल्प है.

इंटरनेट पर ज्यादा भरोसा न करें: नौकरी पर जाने वाले लोग ऑफिस में पूरे दिन इंटरनेट के सामने बैठे रहते हैं. उस में वे पढ़ते हैं. लेख पढ़ते हैं. अपनी जानकारी बढ़ाते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि इस प्रकार वे पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन वे गलत होते हैं क्योंकि अक्सर सिविल सर्विसेज में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से संबंधित सवाल कम आते हैं. इसका कारण यह है कि सिविल सेवा के परीक्षा पत्र तैयार करते समय यह ध्यान में रखा जाता है कि यह पूरी परीक्षा सभी भारतवासियों के लिए है और अधिकतर जनसंख्या के पास इंटरनेट का विकल्प नहीं होता है तो वे लोग किताबों से ही अपनी पढ़ाई करते हैं. ऐेसे में, किताबों व अन्य माध्यमों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही ज्यादातर प्रश्र पूछे जाते हैं. साथ ही अपने पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए ही आवश्यक विषयों की पढ़ाई करें. शुरुआत में तो आप को इंटरनेट से पढ़ाई करना अच्छा लगेगा लेकिन बाद में आप को यह काम का नहीं लगेगा. आप इंटरनेट का इस्तेमाल करें लेकिन पूरी तरह से उस पर ही निर्भर न हो जाएं.

आप की याद्दाश्त की सीमा हैः कभी-कभी पढ़ते समय कोई भी विषय या जानकारी हम पढ़ लेते हैं. याद कर लेते हैं. सवाल का जवाब, संबंधित डाटा उसका विश्‍लेषण आदि सब दिमाग में उतर जाता है लेकिन अगर उसे दिमाग में ही छोड़ दिया तो इसकी कोई गारंटी नहीं होगी कि मुख्य परीक्षा के समय आप उसे याद रख पाएंगे क्यों कि दिमाग में सभी चीजें हमेशा याद नहीं रहतीं तो आप जो भी याद करते हैं उसके छोटे-छोटे नोट्स बनाते जाएं व उन्हें दोहराना न भूलें.

बाद के लिए कुछ न छोड़ें:  बहुत सारे अभ्यर्थी पढ़ते समय अखबार का लेख संभालकर रख लेते हैं. कंप्यूटर पर पेज सेव करके रख लेते हैं कि बाद में उसे पढ़ेंगे. लेकिन यकीन मानिए कि उनका बाद कभी नहीं आता क्योंकि आखिरी मिनट तक आप इतने व्यस्त होते हैं कि इनको पढने के बारे में आप भूल ही जाते हैं और वे धरे के धरे रह जाते हैं. परीक्षा से कुछ दिन पहले आप अन्य आवश्यक चीजों को प्राथमिकता देते हैं और यह संभालकर रखी हुई सामग्री बिना पढ़े ही रखी रह जाती है. इसलिए जो चीज आप पढ़ रहे हैं उसे अधूरा न छोड़ें. उस गति में ही सब पढ़ लें. साथ ही कुछ समय के बाद उन्हें दुबारा पढ़ लें ताकि आप उसे भूले नहीं. जब भी आप पढ़ें तो आवश्यक चीजों को निशान लगा दें कि दोहराते समय वे आप को याद रह सके.
यह सब बातें बेबुनियाद हैं जब तक आप एक बात को गांठ न बांध लें कि आप को अच्छा लगे या न लगे आप को पढ़ाई तो करनी ही पड़ेगी. अपने सपनों को पूरा करने के लिए उसमें रूचि लेनी ही पड़ेगी. वैसे भी किसी ने ठीक ही कहा है कि कमाया हुआ धन तो खर्च हो जाता है लेकिन आप के द्वारा कमाया हुआ ज्ञान कोई आप से छीन नहीं सकता. यदि आप सिविल सर्विसेज में अपना मनचाहा मुकाम न प्राप्त कर पाएं तो भी आप के द्वारा की गई मेहनत बेकार नहीं जाती. आप के लिए और भी दरवाजे खुल जाते हैं. इसलिए नौकरी, समय आदि इन सब बहानों को अपने सपनों व लक्ष्यों के बीच न आने दें. सौ आने की बात तो यह है कि समय किसी के पास नहीं होता, समय तो आप को निकालना पड़ता है.

लेखकः सक्सेस गुरु ए के मिश्रा, चाणक्य आईएएस एकेडमी के निदेशक हैं.