सुपरफास्‍ट रेल, देश की ज़रूरत

देश को आजाद हुए 65 साल हो चुके हैं मगर आज भी हमारी एक्‍सप्रेस रेलें बैलगाड़ी की तरह पटरियों पर दौड़ रही हैं। दिल्‍ली से कोटद्वार पहुंचने में बसों को 216 किलोमीटर की दूरी तय करने में 4 घंटे लगते है वहीं रेलगाड़ी या बैलगाड़ी को दिल्‍ली से कोटद्वार पहुँचने में तकरीबन सात घंटे लगते हैं। तीन घंटे फालतू समय दूसरा बेवक्‍त की वजह से इन डब्‍बों में गढ़वाल की आम जनता बैठना पसन्‍द नहीं करती। अगर हम जापान, चीन, रूस इत्‍यादि देशों की बात करें तो वहॉं 500 से ऊपर की स्‍पीड़ से सुपर रेलें चल रही हैं।

दिल्‍ली से जयपुर 248 किलोमीटर, चंडीगढ़ 257, शिमला 370, आगरा 203, अम्‍बाला 206 किलोमीटर की दूरी पर हैं। अगर दिल्‍ली से 200 या 300 किलोमीटर की रेंज तक सुपरफास्‍ट ट्रेनों की सुविधा हो जाए और इन ट्रैनों को मेट्रो रेल की तरह कुछ मिनटों के अंतराल पर चलाया जाए और सफर भी आधा या पौन घंटे का हो जाए तो दिल्‍ली की भविष्‍य में आने वाली तमाम कई परेशानियों का काफी हद तक हल निकल सकता है।

दिल्‍ली में बिजली, पानी, रिहाईश, गैस, रोग, गंदगी, भीड़ तमाम कई परेशानियां हैं जिनकी वजह से अब दिल्‍ली रहने की जगह नहीं रही।

अगर दिल्‍ली को स्‍वच्‍छ, सुन्‍दर बनाना है तो दिल्‍ली से 300 किलोमीटर की दूरी तक के शहरों को सुपरफास्‍ट मेट्रो से जोड़ना है जिससे लोगों का पलायन रूक सके और सिर्फ नौकरी या व्‍यवसाय करने वाले रोज अपने घरों से अप-डाउन कर सके। उम्‍मीद है कि ऐसा होने से इन रूटों पर चल रही कारों, बसों इत्‍यादि से सफर नामात्र का रह जाएगा।

आओ एक सुन्‍दर सपने को साकार करने में पहल करें।

-मो.इस्‍माईल