बिजली वितरण कंपनियों का घौटाला, उठे सवाल

नई दिल्ली: परफाम्रेस स्टैंर्डड व सप्लाई कोड पर डीईआरसी मुख्यालय में चल रही जनसुनवाई के दौरान आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने बिजली वितरण कंपनियों की कार्यशैली पर उंगली उठाई। हालांकि पूरी जनसुनवाई के दौरान जुलाई और अगस्त माह में आए बिजली के बढ़े बिलों का मुद्दा छाया रहा। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियां मनमाने तरीके से बिल भेज रही हैं। जनसुनवाई में डीईआरसी अध्यक्ष पीडी सुधाकर के अलावा सदस्य जेपी सिंह और श्याम बढेरा उपस्थित रहे। आजादपुर आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष आरके रोहिल्ला ने कहा कि जून माह जिन घरों में 100 से 200 यूनिट का बिजली बिल आता था, जुलाई माह में उन्हीं घरों में 600 से 700 यूनिट का बिल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि बिजली की नई टैरिफ दरें एक जुलाई से लागू हुई हैं। ऐसे में अगस्त माह में नई टैरिफ दरों के हिसाब से बिल आना चाहिए, लेकिन जुलाई का ही बिल नई दरों के हिसाब से भेज दिया है। इससे उपभोक्ता खासे परेशान हैं।
आरडब्ल्यूए सदस्य राजीव कंकरिया ने कहा कि अगर उपभोक्ताओं को सुविधाएं मिलें, तो उपभोक्ता बिजली की हर कीमत देने को तैयार है। लेकिन जैसा पहले होता था, वैसा अब भी हो रहा है। पहले भी नया कनेक्शन लेने में महीनों लग जाते थे और अब भी। अगर जल्दी मीटर लगवाना होता है, तो रिश्वत देनी पड़ती है।

पूर्वी दिल्ली आरडब्ल्यूए ज्वाइंट फोरम के अध्यक्ष बीएस बोहरा ने कहा कि राजधानी की निजी बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस राजधानी को इंग्लैंड के हाउस ऑफ कामंस में एटीएंडसी लासेज कम करने के लिए सम्मानित किया गया है। साफ है कंपनी को घाटा कम हुआ है और वह लाभ की स्थिति में है। उपभोक्ताओं के हित में बिजली दरें कम की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़े बिजली बिलों से आम आदमी परेशान है। उन्होंने कहा कि 201 यूनिट उठते ही हर यूनिट के लिए 4 रुपए 80 पैसे चार्ज किया जा रहा है। इससे करीब 22 लाख से अधिक उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं।

डीईआरसी अध्यक्ष ने आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है। डीईआरसी अध्यक्ष ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस यमुना, राजधानी, एनडीपीएल और पारेषण कंपनी ट्रांसको का पक्ष पहले ही सुना जा चुका है। गौरतलब है कि वर्ष 2007 के बाद यह पहली जनसुनवाई परफाम्रेस स्टैंर्डड और सप्लाई कोड पर हो रही है।

परफाम्रेस स्टैंर्डड व सप्लाई कोड पर जनसुनवाई आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने वितरण कंपनियों पर  मनमानी करने का आरोप लगाया।

-एस.एल. वातवानी